राहुल बाबा बने वीडियो लीडर तो मॉम सोनिया के कांग्रेसी चमचों को लगी मिर्ची

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राहुल बाबा बने वीडियो लीडर : एक तरफ कोरोना थमने का नाम नहीं ले रहा है। वहीं दूसरी तरफ चीन और भारत के विवाद का भी कुछ ऐसा ही हाल है। भारत-चीन सीमा विवाद पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा जोरों पर है। राहुल गांधी ने सोमवार को करीब एक मिनट 20 सेकंड के वीडियो संदेश शेयर करते हुए ट्वीट में लिखा- “चीन की सेना ने भारतीय सरजमीं पर कब्जा किया है। सच्चाई छिपाना और उन्हें ऐसा करने देना राष्ट्र विरोधी है। लोगों का इस ओर ध्यान आकर्षित करना देशभक्ति है।” उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार तथ्यों को छुपा रही है और भारतीय भूमि पर चीन की घुसपैठ अपनने आप में सच्‍चाई हैं।

आखिरकार राहुल गांधी के इस ‘रुख’ को लेकर उनकी अपनी पार्टी के ही एक ग्रुप में सवाल उठने शुरू हो गए हैं. आलोचकों के इस ग्रुप के एक मेंबर ने कहा, “वह हमसे बात नहीं करते हैं और हमें नहीं पता कि उन्‍हें कोई सलाह दे रहा है.” यह सदस्‍य अपनी यह राय गांधी परिवार और पार्टी के प्रति निष्‍ठा की वजह से सार्वजनिक तौर पर जाहिर नहीं कर सकते।

पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम से पूछा गया कि क्या उन्‍होंने गांधी को विदेश नीति के परिप्रेक्ष्य में राय दिया है, इस पर चिदंबरम ने स्पष्ट रूप से जवाब दिया कि उन्होंने रक्षा या विदेश मंत्री के रूप में कार्य नहीं किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी कभी-कभी उनकी राय लेते हैं “लेकिन इन वीडियो के लिए नहीं.”

आलोचकों का यह वर्ग दावा करता है कि पार्टी की मौजूदा अध्‍यक्ष सोनिया गांधी किसी भी मामले में सार्वजनिक बयान देने से पहले विस्तृत जानकारी हासिल करने का अधिक प्रयास करती है, इस संबंध में वे चीन मुद्दे पर पीएम की ओर से बुलाई गई आल पार्टी मीटिंग का हवाला देते हुए।

एक नेता ने कहा, “वह हमें सलाह देती हैं और अवलोकन करती है. सर्वदलीय बैठक में उन्‍होंने पीएम से पूछे जाने वाले सवालों पर गौर किया।” यह पूछे जाने पर कि उनके बेटे राहुल गांधी इस मामले में अलग राह क्‍यों अख्तियार किए हुए हैं, इस नेता ने कहा अनुसरण क्यों कर रहा है, उन्होंने कहा, “वह (राहुल गांधी) शायद सोचते हैं कि हम बेकार लोग हैं और उनके सलाहकार सबसे अच्छा जानते हैं.”

आपको बता दें कि भाजपा नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने राहुल गाँधी के इस बयान का जवाब देते हुए कहा था, ”उनका करियर बहुत पहले ही खत्म हो चुका है। 2019 में ही आपका राजनीतिक सनसेट (सूर्यास्त) हो गया है। आप केवल कॉन्ग्रेस पार्टी के भविष्य को खत्म करने का लक्ष्य लेकर आगे चल रहे हैं और इसके अलावा राहुल गाँधी को हम बहुत गंभीरता से नहीं लेने वाले हैं। देश की जनता राहुल गाँधी का कोई राजनीतिक भविष्य नहीं देखती है।”

जब बेटा राहुल गाँधी आगे बढ़ता है तो माता सोनिया गाँधी के चमचों को बुरा लग जाता है। राहुल गाँधी की टीम आगे न बढ़े इसलिए कभी ज्योतिरादित्य तो कभी सचिन पायलट के नाम को आगे बढ़ाने की वजह के चलते टीम को तोड़ने लगते है जबकि एक पहलू यह भी है कि राहुल गाँधी खुद किसी को अपने आगे टिकने नहीं देते है। राहुल गाँधी कांग्रेस के अघोषित शहज़ादे भले ही हो लेकिन वह खुद चीन के एजेंट बने रहते है इसलिए उन्हें जब उनकी ही पार्टी वाले नहीं सुनते तो दूसरों का क्या है।

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