कश्मीरी मुस्लिम आतंकवादी

कश्मीरी मुस्लिम युवा ही क्यों बनते है आतंकवादी ?

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जम्मू कश्मीर और आतंकवाद के रिश्ते से तो पूरा देश परिचित है। वर्षों से कश्मीर में आतंकवादियों और पत्थरबाजों ने दहशत फैला रखी थी। परंतु अब यह लग रहा है कि जब से प्रधानमंत्री मोदी जी ने कश्मीर से धारा 370 हटाई है और उनसे लगभग सभी खास अधिकार छीन लिए हैं तब से वहां कुछ सुधार तो हुआ है।

आंकड़ों की मानें तो पिछले साल कश्मीर के 105 युवा आतंकवादी बने थे परंतु इस वर्ष यह आंकड़ा घटकर 67 का हो गया है। कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियां भी पिछले साल 188 से गिरकर 120 हो गई है। जब से मोदी जी ने वहां से धारा 370 हटाई है तब से लेकर अब तक वहां 22 लोगों की जान जा चुकी है जो कि पिछले साल के मुकाबले काफी कम है।

यह तो हो गई आंकड़ों और सुधार की बात परंतु सोचने वाली बात यह है कि आखिर कश्मीर के युवा ही क्यों आतंकवादी बनते हैं? सिर्फ युवा ही क्यों आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होते दिखाई देते हैं? क्या कश्मीर के युवा इतने बेरोजगार है कि उन्हें आतंकवाद को अपनाना पड़ता है या फिर भी यह सब अपनी इच्छा से करते है?

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कश्मीर के युवा आतंकवाद को चाहे अपनी इच्छा से अपनाएं या फिर अपनी मजबूरी से अपनाएं परंतु इसका खामियाजा कश्मीर ही नहीं बल्कि हिमाचल तथा उत्तराखंड जैसे राज्यों को भी भुगतना पड़ता है। बीते हुए समय में ऐसे बहुत सारे बहुत सारी स्थितियां आई थी जब कश्मीर के आतंकवादियों की हिमाचल और उत्तराखंड जैसे राज्यों में घुसने की खबरें आई थी।

इसके साथ ही अन्य राज्यों के मुस्लिमों को भी बहुत कुछ झेलना पड़ता है। अक्सर हमारे देश में अन्य राज्य के मुसलमानों को भी आतंकवादी की नजरों से देखा जाता है। और यह सब कुछ होता है सिर्फ और सिर्फ कश्मीर के युवाओं की वजह से जो आतंकवादी की गतिविधियों में शामिल होते हैं।

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