देश के सबसे बड़े पॉलिटिकल ब्रोकर रहे अमर सिंह का निधन, जाने उनसे जुड़े टॉप 5 विवाद

प्रमुख खबरें राजनीति

राजसभा सांसद और समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह का शनिवार को 64 वर्ष की आयु में देहवसान हो गया। उनका इलाज लंबे समय से सिंगापुर के अस्पताल में चल रहा था। बीमारी के दौरान इसी अस्पताल से उन्होंने एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमे वह अमिताभ बच्चन और उनके परिवार से माफी मांगते हुए नज़र आ रहे थे। निःसंदेह वह भारत की आधुनिक राजनीति में सबसे बड़े पॉलिटिकल ब्रोकर थे। आइये जानते है उनके पूरे जीवन से जुड़े विवादों के बारे में …………….

राजनीति की शुरुआत

मुलायम सिंह का दाहिना हाथ कहे जाने वाले अमर सिंह ने अपना राजनैतिक सफर उत्तर प्रदेश से शुरू किया था। साल 1996 में फ्लाइट के दौरान अमर सिंह की तत्कालीन रक्षामंत्री मुलायम सिंह से मुलाकात उनके लिए एक अवसर के रूप में साबित हुई। जिसके बाद ही अमर सिंह ने राजनीति में अपने पैर डाल दिये। इस मुलाकात के बाद मुलायम सिंह ने उन्हें पार्टी का महासचिव घोषित कर दिया। समाजवादी पार्टी से राज्य सभा के संसद रह चुके अमर सिंह को पारिवारिक विवाद के पार्टी से निष्काषित कर दिया गया। कथित तौर पर इसका जिम्मेदार आजम खान और अखिलेश यादव को माना जाता है। मुलायम सिंह द्वारा 2010 में पार्टी से निकाले जाने के बाद तो अमर सिंह ने राजनीति से थोड़ा ब्रेक लिया। जिसके बाद 2016 में एक बार फिर इन्हें पार्टी में शामिल कर लिया गया

मुलायम के परिवार में दरार पैदा के ज़िम्मेदार

अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच साल 2016 में पार्टी को लेकर चल रही खींचतान के बीच रामगोपाल ने जिस कथित को ‘बाहरी व्यक्ति’ को बार- बार ज़िम्मेदार ठहराया वो अमर सिंह ही थे। मुलायम सिंह इस विवाद से दूरी बनाते हुए अमर सिंह को पार्टी से बाहर कर दिया था। मुलायम और अखिलेश को शाहजहां और औरंगजेब के रूप में प्रचारित करने का आरोप भी अमर सिंह पर लगा।

अंबानी के परिवार में फूट डालने का आरोप

साल 2002 में धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद उनके दोनो बेटे अनिल अंबानी और मुकेश अंबानी में संप्पति को लेकर विवाद हो गया। विवाद की वजह यह थी कि धीरूभाई अंबानी ने 80 हजार करोड़ का टर्नओवर करने वाली रिलाइंस इंडस्ट्रीज के बटवारे को लेकर वसीयत नहीं लिखी थी। अनिल अंबानी ने इस मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सहायता की गुहार की थी।

अनिल अंबानी की अमर सिंह से मित्रता और उनके चलते मुलायम सिंह से करीब के ताल्लुक रखना मुकेश अंबानी की अपने छोटे भाई से नाराज़गी की वजह बना था। हालांकि बाद में समाजवादी पार्टी ने अनिल अंबानी को राज्य सभा की सीट का ऑफर भी दिया जिसको उन्होंने ठुकरा दिया था।

सुशांत सिंह केस में शामिल होकर नीतीश चाचा खुद के पाप धोना चाहते है

घूस लेने में भी नाम

अमर सिंह यूपीए 1 के समय अमेरिका के साथ प्रस्तावित परमाणु समझौते को लेकर भाजपा द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में सांसदो को कथित रूप से घूस देने के मामले में भी दोषी पाए गए। फग्गन सिंह कुलस्ते, महावीर भगौरा के साथ मिलकर एक और सांसद ने जब नोटों का लालच दिया था, तब अमर सिंह इनके लालच में आ गए थे। हालांकि ये आरोप बाद में उनके सिर से हट गए।

स्वयं की पार्टी का किया गठन

अमर सिंह ने राष्ट्रीय लोकमंच नामक पार्टी का गठन किया और प्रदेश में चुनाव भी लड़े। लेकिन पार्टी को एक भी सीट पर सफलता नहीं मिली। वह अंत में भाजपा के नज़दीक जाते हुए दिखे लेकिन आधिकारिक तौर पर उन्होंने कभी पार्टी ज्वाइन नहीं करी। कभी मुलायम सिंह के करीबी रहे तो राजनीतिक जीवन के अंतिम दौर में उन्होंने खुद को प्रखर हिन्दुवादी बताते हुए पीएम नरेंद्र मोदी का हितैषी दर्शाया। सब ने जब साथ छोड़ दिया तो केवल जयाप्रदा ही उनके करीब दिखी। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री बनना हो या फिर बॉलीवुड में हाई प्रोफाइल लाबीस्ट रहना हो और हमेशा की तरह पॉलिटिकल ब्रोकर रहना हो, अमर सिंह ने विवादों के बीच विशेष हस्ती होने में कामयाबी हासिल की है। 

Sharing is caring!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *