बकरीद सेक्युलर हिन्दू

बकरीद की बधाई क्यों देते है “सेक्युलर” हिन्दू?

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जैसा कि आप सब लोग जानते हैं आज बकरीद है। यह मुसलमानों का विवादित त्योहार है। उन मुसलमानों का जिनकी वजह से देश को बहुत ही समस्याओं का सामना करना पड़ता था, पड़ रहा है और क्या पता आगे भी पढ़ता रहेगा।

कुछ सेक्युलर हिंदू या हम यूं कहें कि कुछ मुर्ख हिंदू इन मुसलमानों को बकरीद की बधाइयां बांटते फिर रहे हैं। ठीक है, हमारे हिंदू धर्म में कहा गया है कि सब धर्मों का सम्मान करें सब धर्मों के त्योहारों का सम्मान करें। परंतु यदि देखा जाए तो सम्मान उसी का किया जाता है जो बदले में आप का सम्मान भी करें। मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि देश में मुश्किल से चार से पांच ऐसे मुसलमान होंगे जो हिंदूओं को उनके त्यौहार जैसे कि दीपावली, होली, शिवरात्रि, हनुमान जयंती पर बधाई देते हो तो। फिर इन सेक्युलर हिंदूओं ने ही क्यों सब धर्मों को बधाई देने का ठेका उठा रखा है।

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सेक्युलर होने का अर्थ यह नहीं है कि आप अपने आत्मसम्मान को ही भुला दें। जी हां, मुसलमानों को उनके त्यौहारों पर बधाई देने पर आप एक तरह से अपने आत्मसम्मान को ही खो रहे हैं। क्योंकि जब आप उन्हें बधाई देते हैं बदले में वह आपको आतंकवादी देते हैं। तो आज आपका सेक्युलरिज्म देश से बड़ा हो गया। यदि अपने आत्मसम्मान की कोई चिंता नहीं है तो कम से कम देश की चिंता तो करो।

इस तरह के हिंदूओं को तो कलमा पढ़ कर मुसलमान बन जाना चाहिए। परंतु खुद को सनातनी नहीं कहना चाहिए। यह बहुत ही गलत है। बकरीद पर मुसलमानों को बधाई देने का कोई मतलब नहीं बनता है।

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