The book of 'Delhi Riots' 2020: The Untold Story गरुड़ प्रकाशन ब्लूम्सबरी

गरुड़ प्रकाशन द्वारा छापी जाएगी दिल्ली दंगों पर किताब: वामपंथियों के आगे झुक गया ब्लूम्सबरी

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ब्लूम्सबरी ने दिल्ली दंगों पर आधारित किताब को छापने का फैसला लिया था। किताब का नाम The book of ‘Delhi Riots’ 2020: The Untold Story रखा गया है। परंतु इस्लामी और वामपंथियों के दबाव में आकर ब्लूम्सबरी ने अचानक ही किताब को ना छापने का फैसला ले लिया था। अब गरुड़ प्रकाशन दोबारा से इस किताब को छापने जा रहा है। किताब तिन लेखिकाओं द्वारा लिखी गई है।। लेखिकाओं के नाम मोनिका अरोड़ा, प्रेरणा मल्होत्रा तथा सोनाली चितालकर है|

लेखिका मोनिका अरोड़ा ने ट्वीट करके यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि निवेदन के बाद हमें लिखित तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गई। हम अपनी किताब की इस कदर हत्या नहीं कर सकते हैं। लोग हमारी किताब को खरीदना चाहते हैं। इसलिए किसी और प्रकाशन समूह को चुनने के अलावा हमारे पास कोई और रास्ता नहीं है। पहले यह तय हुआ था कि ब्लूमबरी ही इस किताब को छापेगी। परंतु अचानक ही उन्होंने किताब के प्रकाशन पर रोक लगा दी।

लेखिका ने ब्लूम्सबरी को मेल करके यह पूछा कि यदि वह किताब को प्रकाशित नहीं करना चाहते हैं तो उन्हें लिखित में संवाद देना पड़ेगा। परंतु ब्लूम्सबरी की तरफ से कोई रिप्लाई नहीं आया तथा उन्होंने फोन पर ही यह जानकारी दी कि वह किताब को प्रकाशित नहीं करेंगे। इसके बाद लेखिकाओं ने गरुड़ प्रकाशन को किताब छापने के लिए चुना है।

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गरुड़ प्रकाशन ने भी ट्वीट करते हुए लेखिकाओं का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि आपके सहयोग के लिए धन्यवाद।  यह किताब दोनों भाषाओं हिंदी तथा इंग्लिश में प्रकाशित की जाएगी। ब्लूम्सबरी के साथ किताब छापने का काम भी काफी आगे बढ़ चुका था। किताब अमेजॉन पर प्री बुकिंग के लिए भी उपलब्ध थी। परंतु जैसे ही लेखिकाओं ने भाजपा नेता कपिल मिश्रा की अगुवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किताब के बारे में जानकारी दी, वैसे ही कांग्रेस तथा तमाम वामपंथी नेताओं ने मिलकर किताब की आलोचना करना शुरू कर दिया।

उसके बाद ब्लूम्सबरी ने दबाव में आकर किताब को छापने से इंकार कर दिया और गरुड़ प्रकाशन किताब छापने का प्रस्ताव रखा। इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि कांग्रेस ने फिर से किसी अच्छे काम में अपनी टांग अड़ाई हो। मॉडर्न कांग्रेस ने कोई भी काम देश के हित में नहीं किया है तो इस बार भी वह कैसे यह होने देती। परंतु हर बार की तरह कांग्रेस की साजिश इस बार भी नहीं चल पाई तथा किताब को किसी और प्रकाशन समूह में छापने का फैसला ले लिया है|

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