शार्ली हेब्दो पैगंबर मोहम्मद

शार्ली हब्दो ने दोबारा छापा इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून

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वो घटना भूलने लायक नहीं है, जिसने इस दुनिया को तीन हिस्सों बांट दिया। 7 जनवरी 2015 का वो दिन जब फ्रांस की पत्रिका शार्ली हेब्दो सबसे मशहूर कार्टूनिस्टों समेत 12 लोगों की नरसंहार में जान ले ली गई। सईद और शेरिफ कुआशी नाम के आतंकीयों ने पेरिस में पत्रिका के दफ्तर में घुस कर धुंआधार गोलीबारी की जिसमें एक पुलिसकर्मी की भी जान चली गई। इन दोनों इस्लामिक कट्टरपंथीयों ने खुद को अल कायदा से जुड़ा बताया।

इन लोगों ने गोलीबारी के बाद कहा, “हमने पैगंबर का बदला ले लिया।” उस हमले के गुनाहगारों पर मुकदमा शुरू होने के मौके पर पत्रिका ने एक बार फिर पैगंबर मोहम्मद के कार्टून दोबारा छाप दिया है। पत्रिका के निदेशक लॉरां रिस सुरिसे ने शार्ली एब्दो के ताजा अंक के संपादकीय में लिखा है, “हम कभी नहीं झुकेंगे, हम कभी पीछे नहीं हटेंगे.” इसी अंक में कार्टून दोबारा छापे जा रहे हैं।

इसी हमले के दौरान एक यहूदी सुपरमार्केट को भी निशाना बनाया गया और अगले कई दिनों तक अलग-अलग जगहों पर हमले होते रहे सुपरमार्केट में अमेदी कुलबेली नाम के एक शख्स ने चार लोगों को बंधक बनाकर हत्या कर दी गई। कुल मिला कर 17 लोगों की हत्या हो चुकी है। कुलबेली और ये दोनों भाई पुलिस की जवाबी कार्रवाई में मारे गए। इन लोगों को हथियार और दूसरी तरह की कथित मदद देने वाले 14 लोगों का पुलिस ने पता लगाया। इन्होंने खुद को इस्लामिक स्टेट से जुड़ा बताया। इन्हीं 14 लोगों के खिलाफ पेरिस में बुधवार से मुकदमा शुरु हो रहा है। इनमें एक महिला भी शामिल है।

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हाल ही में शर्ली एब्दो के नये अंक के कवर पर दर्जन भर कार्टून छापे गए हैं। 2005 में सबसे पहले इसे डेनमार्क के अखबार ज्युलैंड पोस्टेन ने छापा था और 2006 में इसे शर्ली ने छापना शुरू किया।

शार्ली हेब्दो द्वारा कार्टून छपने की भर में बवाल मचा हुआ था। कवर के मध्य में काबू के नाम से मशहूर कार्टूनिस्ट जाँ काबु का बनाया कार्टून है। जाहिर है काबू की भी इस आतंकी हमले में हत्या कर दी गई थी। पहले पन्ने की हेडलाइन है, “ऑल ऑफ दिस जस्ट फॉर दैट (यह सब बस इसके लिए हुआ)।” जानकारी के लिए बता दें कि मुसलमान पैगंबर मोहम्मद की तस्वीर या कार्टून को ईशनिंदा के रूप में देखते हैं। शार्ली हेब्दो अलग-अलग धर्मों के पैगम्बरों या भगवानों का कार्टून बनाने को अभिव्यक्ति की आजादी मानता है और अकसर यह काम करता है। पत्रिका में इन कार्टूनों को बार बार छापा जाता है। 

शार्ली एब्दो के संपादकीय  पत्रिका की टीम ने उन कार्टूनों को दोबारा छापा जाने का यही सही समय माना है। उनके मुताबिक मुकदमा शुरू होने के लिहाज से अब यह “जरूरी” है। टीम ने लिखा है, “जनवरी 2015 के बाद हमसे अकसर मोहम्मद के दूसरे कार्टूनों को छापने के लिए कहा जाता रहा। हम हमेशा यह करने से मना करते रहे, इसलिए नहीं क्योंकि इस पर कोई रोक है, कानून हमें ऐसा करने की इजाजत देता है। 

हमें ऐसा करने के लिए किसी मकसद की जरूरत थी, ऐसा मकसद जिसका कोई अर्थ हो और जिसे लेकर बहस की जा सके.” पत्रिका के दोबारा कार्टून छापने के फैसले ने उसे फ्रांस में बहुत से लोगों के लिए बोलने की आजादी का अगुआ बना दिया।

हालांकि बहुत से लोग मानते हैं कि वह जरूरत से ज्यादा अपनी हदों से पार जाता है। इन सबके बाद भी इस खूनी इस्लामिक आंतकवादी हमले ने लोगों को दुख की घड़ी में एकजुट किया. बहुत दिनोंसे सोशल मीडिया #JeSuisCharile(आइ एम शार्ली) वायरल होता रहा। 

वक़्त आ चुका है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात करने वाले लोगों को दूसरे पक्ष यानी इस्लाम पर कटाक्ष, व्यंग, हमला या सवाल करने को भी अभिव्यक्ति की आज़ादी के दायरे में गिनने लग जाना चाहिए नहीं तो स्वीडन या नॉर्वे की तरह अन्य धर्म समुदाय के लोग भी इस्लाम के खिलाफ खुद ही प्रदर्शन करने सड़को पर उतर जाएंगे जिससे क्रिया-प्रतिक्रिया तंत्र वाली सांप्रदायिकता शुरू हो जाएगी जो कि मानवता के लिए घातक है। 

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