कंगना राणावत पर हमला दर्शाता है कैसे समाज लड़की पर हो जाता है हावी

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कंगना राणावत पर हमला : एक महिला की पूरी जिंदगी हमेशा अधीनता में गुजरती है। जब एक लड़की छोटी होती है तो वो अपने पिता के अधीन होती है और जब वो किशोरावस्था में आती है तो भाई के अधीन और शादी के बाद अपने पति अधीन हो जाती है। इसके बाद जब वो मां बनती है तो बेटों की अधीनता में जिंदगी जीती है। हमारे देश में महिलाओ को यही समझाया जाता है यही अहसास कराया जाता की उनके साथ कुछ भी गलत हुआ तो उनकी इज्जत जाएगी उनका मान घटेगा। कई तरह का डर है जो महिलाओ को समाज में डरा के रखता है।

समाज हमेशा से ही लड़कियों को अपने नियम कानून और कायदों की जंजीर में बांधता आया है। उसका पूरा जीवन अपने अधीन रखा। अधीनता की एकमात्र वजह है “डर”। वही डर जो लड़कियों को बचपन से दिखाया जाता है कि वो खुद से कुछ नहीं कर सकती है कुछ करने के लिए हमेशा उसे दूसरों पर निर्भर रहना है।

हालाकि प्राचीन काल में महिलाओं की स्थिति बहुत बेहतर थी।आप स्वयं देखते है रामायण महाभारत महिलाओं के स्वाभिमान के लिये ही हुई थी।सभी मूर्तीयो से, सभी ग्रंथो से यह साबित होता है कि उस वक़्त परदा प्रथा या बाल विवाह जैसी की रूढ़िवादी प्रथा नहीं थी।पुलिस और न्याय व्यवस्था दुरस्त थी ,हर तरफ माहौल सुरक्षित था इसलिए प्राचीन काल मे महिलाओं को हर तरह की आजादी थी। मध्यकाल में महिलाओं की स्थिति दयनीय इसलिए थी क्योंकि पुलिस और न्यायव्यवस्था बहुत खराब थीं। और आज भी वही हालात हैं।

आज के समय की बात करें तो ऐसी बहुत महिलाएँ है जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए कड़े संघर्ष किये है और सामाजिक दवाब के कारण ऐसी महिलाओं का संघर्ष बढ़ता ही रहा है। इसका उदारण है बॉलीवुड की क्वीन कही जाने वाली मशहूर एक्ट्रेस कंगना राणावत, जो एक बेवाक शख्सियत है। वे सुशांत सिंह राजपूत के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात बोल रही है जबसे सुशांत के केस में ड्रग्स के मामले सामने आ रहे हैं तब से कंगना के निशाने पर बॉलीवुड के स्टार्स भी आ गए हैं इस संबंध में कंगना ने कई नामों का खुलासा भी किया है साथ ही सुरक्षा की मांग भी की है।

दरअसल हाल ही में कंगना ने एक ट्वीट किया और इस ट्वीट में कंगना ने ये दावा किया है कि उन्हें संजय राउत की तरफ से धमकी मिली है। शेयर किए गए ट्वीट में कंगना ने लिखा ,’ शिव सेना लीडर संजय राउत ने मुझे खुली धमकी दी है और मुझसे कहा है कि मुंबई वापस न आऊं, मुंबई की गलियों में आजादी ग्रैफिटी और अब खुली धमकी, मुंबई पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर जैसी फीलिंग क्यों दे रहा?

हालांकि कंगना का यह बयान बॉलीवुड को रास नहीं आया। बॉलीवुड की कई अभिनेता और अभिनेत्रियों ने इसका विरोध भी किया है। बिना किसी गॉडफादर के अकेले कंगना ने अपने दम पर बॉलीवुड में अपनी जगह बनाई उनका संघर्ष किसी से छुपा नहीं है लेकिन आज भी उनका खुल कर बोलना उनके लिए खतरा बनता जा रहा है। क्या हर मुद्दे पर अपनी राय रखने वाली कंगना को बॉलीवुड से लेकर राजनेताओं और समाज से अाज अपनी बात कहने के लिए भी जूझना पड़ रहा है। इतनी सफल अभिनेत्री होने के बाद भी कंगना की लड़ाई खत्म नहीं हो रही है।

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या यूं कह सकते हैं कि हमारे पितृसत्तात्मक समाज को किसी औरत का इस तरह आवाज उठाना रास नहीं आ रहा। कंगना ने नेपोटिज्म से लेकर सुशांत के मर्डर केस और आउटसाइडर्स होने पर खुलकर बॉलीवुड में बैठे बड़े आकाओं की आलोचना की। और यह दिखा दिया कि वे सच में झांसी की रानी है। यह एक सफल अभिनेत्री की कहानी है लेकिन आज भी भारत में महिलाओं को समाज के नाम पर कई सारे अधिकारों से वंचित रखा जाता है।

देवी देवी कहकर पूजने वाले लोग भी उसी देवी की शक्ति को समाज के नाम पर दबा देते हैं। उसी देवी की शक्ति को इच्छा शक्ति नहीं बल्कि सहनशक्ति में बदल दिया जाता है। लैंगिक भेदभाव, दहेज-प्रथा, अनर्गल, बेतुके तथाकथित धार्मिक मान्यताऐं ….आदि की दुहाई देकर ; परिवार, समाज,रिश्ते,रस्म धर्म ,संस्कृति, परम्परा आदि का बोझ डालकर मानसिक उत्पीड़न ,शारीरिक दोहन और स्वातन्त्रय जीवन में पुरूष वर्चस्व का अतिक्रमण व हस्तक्षेप अभी भी जारी है।

किन्तु अब यह समय महिलाओं को शिक्षित, स्वावलम्बी, संघर्षशील और साहसिक कदम उठाने की जरूरत है। सिर्फ अपने लिए ही नहीं , सम्पूर्ण नारी समाज के उत्थान और सशक्तिकरण के वास्ते..….। तभी एक सुन्दर, सशक्त और समृद्ध समाज की परिकल्पना धरातल पर उतर सकती है।

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