मदर टेरेसा ने दलितों का ब्रेन वॉश कर, किया धर्मपरिवर्तन…कमाई अरबों में

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विदेश से आई ‘अगनेस गोंझा बोयाजिजू’ उर्फ ‘मदर टेरेसा’ जो भारत में आकर गरीब लोगो की मदद के नाम पर उनका धर्म परिवर्तन करवाती थीं. उनको लोगों ने सर- आँखों पर इस कदर बैठा लिया कि आज 05/09/2020 को शिक्षक दिवस मनाने से ज्यादा लोग उनकी पुण्य तिथि मना रहें है। 09 सितम्बर 2016 को वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस ने मदर टेरेसा को संत की उपाधि से विभूषित किया। मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को स्कॉप्जे (अब मेसीडोनिया में) में हुआ था. तुर्क की रहने वाली मदर टेरेसा 18 साल की उम्र ‘सिस्टर्स ऑफ़ लोरेटो’ में शामिल होने का फैसला ले लिया। इसके बाद यह आयरलैंड जाकर इन्होंने भारत में बच्चों को पढ़ाने के लिए
अंग्रेजी भाषा सीखी।

मदर टेरेसा ने सबसे अच्छा धंधा भारत में किया है. यहां आकर उन्होंने गरीबों की सेवा के नाम पर अरबों रुपये बटोरे थे. गरीबों को मुश्किलों का सामना करने की सलाह देकर खुद ऐश से जिंदगी बिताई. इसके अलावा कई चिकित्सा पत्रिकाओं में भी उनकी धर्मशालाओं में दी जाने वाली चिकित्सा सुरक्षा के मानकों की आलोचना की गई और अपारदर्शी प्रकृति के बारे में सवाल उठाए गए, जिसमें दान का पैसा खर्च किया जाता था. एक पत्र में कनाडा के शिक्षाविदों सर्ज लारिवे, जेनेवीव चेनेर्ड और कैरोल सेनेचल ने लिखा कि क्लीनिक को दान में लाखों डॉलर मिले, लेकिन पीड़ित लोगों के लिए चिकित्सा देखभाल, व्यवस्थित निदान, आवश्यक पोषण और पर्याप्त एनाल्जेसिक की पर्याप्त मात्रा नहीं थी। 
मदर टेरेसा ने बिमार लोगों को क्रास पर क्रास्ट की तरह तकलीफ़ झेलने की सलाह दी, जबकी खुद बिमार होने पर तो उन्होंने एक हाई – फाई अस्पताल में अपना इलाज कराया और कुछ 05/09/1997 में इनका देहांत हो गया। भारी मात्रा में दुनिया भर से दान में पैसा मिलने के बावजूद उनके संस्थानों की हालत दयनीय थी. खोजी पत्रकार जियानलुइगी नुज़ी ने 2017 में बताया कि वेटिकन के एक बैंक में मदर टेरेसा के नाम पर उनकी चैरिटी द्वारा जुटाई गई धनराशि अरबों डॉलर में थी।

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ज़बरन धर्मपरिवर्तन करना, गर्भपात समेत अन्य महिलाधिकारों का विरोध करना, तानाशाहों और विवादस्पद लोगों और लोगों का समर्थन करना, अपराधियों से पैसा लेना जैसे कार्य इन्होंने चैरिटी की आड़ में खूब कमाई की। इतनी ख़ामियों के बाद भी दुनिया भर लोगों ने मदर टेरेसा को खूब प्यार दिया। 

उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 21 जून 2016 को एक धार्मिक बैठक में मदर टेरेसा पर “ईसाईयों के भारत के लिए षड्यंत्र” का हिस्सा होने का आरोप लगाया है। योगी आदित्यनाथ ने कहा: “मदर टेरेसा हिंदुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की साजिश का हिस्सा थीं। सेवा करने के नाम पर हिंदुओं को निशाना बनाया गया और फिर उनके द्वारा धर्मांतरण किया गया। ” पूर्वोत्तर में ईसाई धर्म के बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के कारण अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में अलगाववादी आंदोलन हुआ। “आप यहां बहुमत में हैं, इसलिए आपको उन स्थितियों का पता नहीं है जो NE में हिंदुओं का सामना करते हैं। आपको जाना चाहिए और स्थिति को देखना चाहिए कि क्या हो रहा है।

योगी ने कहा था कि दलितों को धर्मपरिवर्तन के लिए खासकर चुना गया है। “दलित हमारे भाई हैं लेकिन हममें से कुछ लोग उन्हें भाइयों की तरह गले नहीं लगाते। लेकिन जब ईसाई बन जाते हैं, तो हममें से कुछ उनके साथ जुड़ने में गर्व महसूस करते हैं। यह बात पूर्ण रुप से सही है कि मदर टेरेसा ने गरीबों की सेवा के नाम पर बस दलितों का धर्मपरिवर्तन कराया है. और उनसे पैसे लूटे हैं… इसके बाद भी बेवकूफ लोग उनकी इस चालाकी को समझ नहीं पाए.. और आज के दिन उनकी पुण्य तिथि मनाते हैं। 

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