सुदर्शन न्यूज़ UPSC जिहाद

सुदर्शन न्यूज़ के सच की जीत, UPSC जिहाद पर शो हुआ प्रसारित

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आखिरकार सुदर्शन न्यूज़ ने मुस्लिमों की UPSC जिहाद को एक्सपोज़ करने वाले अपने शो को पूरी सफलता के साथ प्रसारित किया। हिन्दू समाज को सच्चाई दिखाने और अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए पत्रकार सुरेश चव्हाणके को लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी थी।

पिछले दिनों ही दिल्ली उच्च न्यायालय ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय (I & B) के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका में नोटिस जारी कर सुदर्शन न्यूज पर “बिंदास बोल” के प्रसारण की अनुमति दे दी। अदालत ने हालांकि, शो के प्रसारण को रोकने से इनकार कर दिया।

इस शो ने केवल अपने प्रचारक वीडियो के लिए बहुत आलोचना झेली क्योंकि शो “मुसल्मानो के UPSC जिहाद के षड़यंत्र का बड़ा खुलासा करता है जिसमें (यूपीएससी में मुस्लिम घुसपैठ के पीछे की साजिश को बेनकाब किया गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने पहले (28 अगस्त को), शो के प्रसारण पर रोक लगा दी थी, उसी दिन जब इसे 8 P.M पर प्रसारित किया गया था। हालाँकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने शो के प्रसारण पर रोक लगाने से मना कर दिया था। हैरानी की बात यह है कि दोनों ही मामलों में सुदर्शन न्यूज़ का पक्ष रखने के लिए कोई भी उपस्थित था ही नहीं।

यह याचिका एडवोकेट शादाब फरसाट के माध्यम से दायर की गई थी और इसमें आरोप लगाया कि केंद्र केबल टीवी अधिनियम की धारा 19 और 20 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करने में विफल रहा है जो सरकार को किसी भी शो के प्रसारण पर रोक लगाने में सक्षम बनाता है जो कार्यक्रम कोड के अनुरूप नहीं है।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि I & B मंत्रालय का आदेश एक “गैर-बोलने वाला” आदेश है और यह सुदर्शन न्यूज़ के दावे पर आधारित है कि कार्यक्रम प्रोग्राम कोड का उल्लंघन नहीं करता है।

आदेश में कहा गया था कि यदि शो को हिंसक पाया जाता है, तो कार्रवाई की जा सकती है और सुदर्शन समाचार को निर्देश दिया गया है कि यह सुनिश्चित करें कि शो किसी भी प्रोग्राम कोड का उल्लंघन नहीं करता है।

9 सितंबर को आदेश आने के बाद, चैनल के एडिटर-इन-चीफ, सुरेश चव्हाणके ने घोषणा की कि यह शो शुक्रवार 11 सितंबर को प्रसारित किया जाएगा, फिर उन्होंने उसी सांप्रदायिक टोंड प्रचार क्लिप को साझा किया जो उन्होंने इससे पहले ट्विटर पर शेयर किया था  और एक बड़े पैमाने पर विवाद को प्रज्वलित किया।

चव्हाणके ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया और मुस्लिम समुदाय पर एक शो प्रोमो रिलीज़ जिसे “एक्सक्लूसिव एक्सपोज” के रूप में विज्ञापन दिया गया था और इसमें दावा किया गया था कि सिविल सेवा परीक्षा 2020 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों की सफलता“ मुसलमानों द्वारा सिविल सेवा में घुसपैठ करने की साजिश थी।”

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 28 अगस्त को (एक अन्य याचिका में) केंद्र को प्रस्तावित शो के खिलाफ प्राप्त शिकायतों पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने शो के प्रसारण पर तब तक रोक लगाने का आदेश दिया था जब तक कि केंद्र ने मामले में कोई फैसला नहीं कर लेता है।

असल में इसशो के माध्यम से पत्रकार सुरेश चव्हाणके ने पूछना चाहा। “सिविल सेवाओं में उनकी (मुस्लिम) संख्या कैसे बढ़ रही है। इसकी वजह से उन्हें बैक डोर का पक्ष दिया जा रहा है, इस्लामवादी अध्ययन, उर्दू भाषा आदि को चुनने का विकल्प देके। यदि मेरा शो असंवैधानिक पाया जाता है या प्रसारण प्राधिकरण के मानक को पूरा नहीं करता है, तो मेरे खिलाफ कार्रवाई की जाए।” यह शो 12 सितम्बर को प्रसारित किया गया।

अब सिविल एग्जाम की तैयारी करने वाले हिन्दू समाज के लोगों को जिहादी मुस्लिमों की असलियत का पता चल जाना चाहिए और सरकार पर दबाव बनाकर इन सभी हथकंडो को समाप्त करवाने का पुरज़ोर प्रयास किया जाना चाहिए नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब अफसरशाही भी मुस्लिमों भी होगी और दिल्ली में भी कोई नया खलीफा राज करने के लिए आ जाएगा।

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