कैलाश मानसरोवर भारतीय सेना

भारतीय सेना ने फिर से किया कैलाश मानसरोवर पर कब्ज़ा, चीन को पीछे खदेड़ा

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कैलाश मानसरोवर तिब्बत में स्थित एक पवित्र पर्वत है। भारतीय सेना ने कैलाश मानसरोवर पर फिर से कब्ज़ा कर लिया है। इससे पहले, चीन ने कैलाश मानसरोवर के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था जो वास्तव में भारतीय क्षेत्र है। अब, यह 29 अगस्त को चीन द्वारा अवैध कब्ज़े पर भारत की ओर से पहली बार प्रतिक्रिया वाली कार्यवाही सामने आई है। कैलाश मानसरोवर हिंदू भक्तों के लिए बहुत महत्व रखता है।

तिब्बत में स्थित माउंट कैलाश और मानसरोवर चीनी शासन के नियंत्रण में थे। हिंदुओं के अनुसार, यह भगवान शिव के निवास स्थान के रूप में जाना जाता है और भारतीयों के लिए एक पूजनीय स्थान है। लगभग हर पवित्र हिन्दू धर्मग्रंथ में इसका उल्लेख मिलता है। तकनिकी तौर पर देखा जाए तो भारत ने मानसरोवर को चीन से नहीं गंवाया क्योंकि यह भारत का हिस्सा नहीं था, लेकिन यह बात भी ज्ञात होनी चाहिए कि भारत में 2000 वर्षों के करीब पवित्र पर्वत तक निरंकुश पहुंच थी।

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यह तिब्बत में स्थित “नो मैन्स लैंड” जैसा था। यह भगवान शिव की पूजा और निवास का सबसे पवित्र स्थान है। 1947 में, अंग्रेजों के जाने के बाद, भारत बहुत आसानी से मानसरोवर को शामिल कर सकता था जो भारतीय सीमा के करीब है।

भले ही कैलाश मानसरोवर पिछले 500 वर्षों में भारतीय नियंत्रण में नहीं था, लेकिन इस बात के प्रमाण हैं कि 1792 के चीन-नेपाल युद्ध के दौरान चीन के हाथों हारने से पहले यहाँ नेपाल का एक संक्षिप्त नियंत्रण था।

ऐसे ही भारतीय सेना ने पहले फिंगर एरिया 4 की छोटी पर चढ़ाई कर चीन की सेना को सबक सिखाया और समुद्र में भी अपने युद्ध पोतों को तैनात कर सिद्ध कर दिया कि वास्तव में असली शेर वही है और चीन केवल नकली ड्रैगन है जो छल कपट से युद्ध लड़ना जानता है और स्वयंभू वीर बनता है।

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