संघ के एजेंडे

काशी-मथुरा संघ के एजेंडे में नहीं ?

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5 अगस्त को अयोध्या राम मंदिर के भूमि पूजन के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत का जनवरी में दिया गया एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर जोरों से वायरल हो रहा है। जिसमें कहा जा रहा है कि काशी और मथुरा संघ के एजेंडे में नहीं हैं। गौरतलब है कि संघ प्रमुख 15 से 18 जनवरी तक चले संघ के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने मुरादाबाद आये हुए थे, जिसमें उन्होंने प्रमुख 40 संघ कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।

इसी दौरान उन्हें जिज्ञासा सत्र में काशी और मथुरा पर अपने विचार रखने को कहा गया , जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि “काशी और मथुरा संघ के एजेंडे में कभी नहीं रहे”। कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों ने सूत्रों के हवाले से यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित की, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर जोरों से वायरल है।

क्या संघ काशी और मथुरा मुद्दे पर अलग राय रखता है?

संघ प्रमुख के इस बयान को लेकर क्या मायने हैं? यह तो अभी स्पष्ट नहीं है, किन्तु इस बयान ने काशी मथुरा के मंदिर का समर्थन करने वाले श्रद्धालुओं को निराश किया है। सोशल मीडिया यूजर इस बयान लेकर अपने अपने विचार रख रहें हैं। फेसबुक पर काफी सक्रिय रहने वाले , महामंडलेश्वर चिदम्बरानन्द सरस्वती जी ने भी अपनी फेसबुक पोस्ट में इस बयान पर टिप्पड़ी की है।

जिसमें उन्होंने लिखा है कि यदि संघ प्रमुख का यह बयान सत्य है तो यह अत्यन्त निराशा जनक है, किन्तु यदि यह खबर महज अफवाह है तो संघ को इसका खंडन करना चाहिए। जिससे कि आम जनमानस में इस मुद्दे को लेकर कोई भ्रान्ति न रहे।

उनकी इस पोस्ट पर लोगों की तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रहीं हैं। किन्तु अभी तक इस खबर का खंडन संघ के पदाधिकारियों द्वारा नहीं किया गया है। हिन्दू जन समुदाय में इस बयान को लेकर काफी असमंजस की स्थिति सामने आ रहीं हैं।

जो कि बीजेपी के लिए अच्छा संकेत नहीं हैं। इसलिए बीजेपी इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से बच रही है। वहीं अन्य पार्टियों तथा विचारधाराओं से जुड़े लोग इस पर राजनीति कर रहे हैं। लोग संघ प्रमुख द्वारा दिया गए वक्तव्य को हिंदुओं के साथ धोखा बता रहें हैं। अब देखना यह होगा कि आम हिन्दू नागरिक इस बयान को स्वीकार करता है या फिर संघ का विरोध करता है। अपने पाठकों के लिए हम इस मुद्दे पर पैनी नजर बनाएं हुए हैं।

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