हरसमिरत कौर इस्तीफा

हरसिमरत कौर ने दबाव में दिया मोदी सरकार कैबिनेट से इस्तीफा ?

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राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) की नेता हरसिमरत कौर बादल का इस्तीफा स्वीकार कर लिया, जिन्होंने कल शाम केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा, राष्ट्रपति ने नरेंद्र सिंह तोमर को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार लेने का निर्देश दिया है।

अकाली दल की केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया क्योंकि उनकी पार्टी ने पंजाब में किसानों के भारी वीयर्ध का सामना किया क्योंकि उसने भाजपा के खेत क्षेत्र के बिलों को शुरुआती समर्थन दिया था।

हरसिमरत कौर बादल ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि उन्होंने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने ट्वीट किया, “मैंने किसान विरोधी अध्यादेशों और कानूनों के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। किसानों के साथ उनकी बेटी और बहन के रूप में खड़े होने का गर्व है।”

हरसिमरत के पति और शिरोमणि अकाली दल नेता सुखबीर सिंह बादल ने लोकसभा में दो कृषि बिलों कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020′ और ‘कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020’ पर चर्चा के दौरान घोषणा कि वह सरकार छोड़ देगी ।

“भारत के राष्ट्रपति, जैसा कि प्रधानमंत्री ने सलाह दी है, ने संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत, हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है,” राष्ट्रपति भवन द्वारा ज़ारी एक विज्ञप्ति के अनुसार। ”

इसके अलावा, प्रधानमंत्री द्वारा सलाह के अनुसार, राष्ट्रपति ने निर्देश दिया है कि नरेंद्र सिंह तोमर, कैबिनेट मंत्री, को उनके मौजूदा विभागों के अलावा, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का प्रभार सौंपा जाए।

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अकाली दल ने पहले ऐसे तीन विधेयकों का विरोध किया था, जो पहले ही लोकसभा द्वारा पारित किए जा चुके हैं। हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि उन्होंने पंजाब की स्थानीय राजनीति के दबाव में इस्तीफा दिया है।

भाजपा के आर्थिक मामलों के प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा, “गुरुवार को संसद में पारित तीन कृषि बिलों से किसानों को लाभ होगा। लेकिन जिस तरह से कांग्रेस ने पंजाब में झूठ फैलाया है, मुझे लगता है कि एसएडी भी स्थानीय राजनीति के दबाव में आया है। इसीलिए हरसिमरत कौर ने इस्तीफा दे दिया। एसएडी को किसानों को बिलों से होने वाले फायदों के बारे में भी पता है।”

उन्होंने कहा कि विपक्ष कृषि सुधारों के बारे में झूठ फैला रहा है, जैसा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के समय हुआ था और उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इन तीन विधेयकों के माध्यम से किसानों की मांगों को पूरा करने का प्रयास कर रही है। अब हरसिमिरत कौर ने हवा में ही तीर नहीं चलाया है। राज्य में 2022 में चुनाव है और ऐसे में अपने पारम्परिक धार्मिक सिखों द्वारा नाराज़गी झेलने के बाद वह ग्रामीण क्षेत्र में पिछड़ना नहीं चाहती इसलिए एनडीए में बने रहते हुए भी उसने राज्य की राजनीति में खुद की वापसी का रास्ता इसी मुद्दे के सहारे ढूढ़ लिया जिसमें आगे चलकर कहीं इन दोनों पुराने एनडीए साथियों में भी अलगाव न हो जाए इसकी भी सम्भावना है, भाजपा को अकेले पंजाब में स्थापित करने की कोशिशें कर लेनी चाहिए।

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