कंगना के दफ्तर तोड़ने पर कोई जवाब ना होने पर हाईकोर्ट ने बीएमसी को सुनाई खरी खोटी

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कुछ दिन पहले महाराष्ट्र सरकार ने बीएमसी के साथ मिलकर कंगना रनौत का दफ्तर गिरा दिया था। माना जा रहा था कि महाराष्ट्र सरकार ने पर्सनल दुश्मनी के चलते उसका दफ्तर तुड़वाया था। कंगना ने दफ्तर तोड़ने की प्रक्रिया के दौरान ही हाईकोर्ट में याचिका दर्ज कर दी थी। परंतु फिर भी बीएमसी ने कंगना का 2-3 करोड़ का नुकसान कर दिया।

कोर्ट की पहली सुनवाई 8 सितंबर को की गई जिसमें बीएमसी तथा महाराष्ट्र सरकार को कुछ सबूत लाने के लिए कहा। 22 सितंबर को कोर्ट की जब दूसरी सुनवाई चल रही थी, तब बीएमसी तथा महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट से 2 दिन और मांगे। ऐसे में कोर्ट भड़क गया और बीएमसी तथा सरकार को खरी-खोटी सुनाई।

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न्यायाधीश का कहना था कि घर तोड़ते समय तो आपने जरा भी देरी नहीं की। परंतु जवाब देने में आप सुस्ती क्यों दिखा रहे हैं ? हम भरी बरसात में किसी के भी घर को ऐसा टूटा हुआ नहीं रहने दे सकते। इस याचिका पर न्यायाधीश  भडके तो  थे परंतु उन्होंने बीएमसी को 2 दिन का समय दे दिया है। कल कोर्ट की तीसरी सुनवाई की जाएगी।

दूसरी तरफ कंगना राणावत भी महाराष्ट्र सरकार को ताना मारने से पीछे नहीं हट रही है। हाल ही में मुंबई की बिल्डिंग में एक हादसा हुआ जिसमें 50 लोग मलबे के नीचे आकर मर गए। इसी में कंगना रनौत ने बीएमसी पर ताना कसते हुए  एक ट्वीट किया है।  उन्होंने लिखा है कि बीएमसी सरकार यदि मेरे घर को छोड़कर उस बिल्डिंग पर ध्यान देती तो आज वह 50 लोग जिंदा होते। बीएमसी की लापरवाही ने 50 लोगों को मरवा दिया है।

कंगना रनौत ने  ट्वीट करके हाईकोर्ट का शुक्रिया अदा भी किया है। उन्होंने कहा है कि आपने मेरा पक्ष लिया है इससे मेरे सारे जख्मों पर दवाई लग चुकी है। महाराष्ट्र सरकार ने कंगना का दफ्तर तोड़ने में जरा भी देरी नहीं लगाई। उन्हें यह लगा कि वह सबका मुंह बंद करा सकते हैं। परंतु भूल गए थे कि अभी के हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट पर किसी का राज नहीं चलता है। यह कोर्ट सिर्फ और सिर्फ सच के लिए लड़ते हैं।

हाईकोर्ट ने जब महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा तो वह केवल समय ही मांग रही है। क्योंकि उनके पास जवाब देने को कुछ है ही।  हम दावे के साथ कह सकते हैं कि कल की सुनवाई में भी बीएमसी और महाराष्ट्र सरकार बिना किसी सबूत के खाली हाथ आएगी।

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