मथुरा जिला अदालत कृष्ण जन्मभूमि

मथुरा जिला अदालत ने कृष्ण जन्मभूमि पर बनी ईदगाह मस्जिद को हटाने की याचिका स्वीकार की

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मथुरा में दीवानी अदालत ने श्री कृष्ण जन्मभूमि पर कथित रूप से निर्मित ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था लेकिन मथुरा की जिला अदालत ने कल याचिका को स्वीकार कर लिया है। जिला न्यायाधीश साधना रानी ठाकुर की अदालत ने शुक्रवार को याचिका को स्वीकार कर लिया और मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर के लिए टाल दी।

वादी ने 12 सितंबर (सोमवार) को मथुरा में जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद सिविल कोर्ट ने 30 सितंबर को याचिका खारिज कर दी थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए आज जिला अदालत के न्यायाधीश ने निचली अदालत से रिकॉर्ड तलब किया था।

यह याचिका अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने दायर की थी, जो मथुरा जिला अदालत में श्री कृष्ण लाला विराजमान और सात अन्य की “अगला मित्र” थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से श्री कृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ जमीन खाली करने की भी अपील की।

“अगला मित्र” एक ऐसे व्यक्ति के लिए एक कानूनी शब्द है जो किसी ऐसे व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है जो किसी मुकदमे को बनाए रखने में असमर्थ है।

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यह याद किया जा सकता है कि वरिष्ठ सिविल जज छाया शर्मा ने 30 सितंबर को पहले याचिका को खारिज कर दिया था। इसे उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के तहत बार का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दिया गया था।

मथुरा जिले में सिविल जज डिवीजन छाया शर्मा कीअदालत में पिछले महीने याचिका दायर की गई थी। मथुरा के कटरा केशव देव में कृष्णा मंदिर के बगल में जिस जमीन पर शाही ईदगाह मस्जिद बनाई गई है, उस पर दावा किया गया था।

याचिका में कथित तौर पर मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट के प्रबंधन की समिति द्वारा अवैध रूप से उठाए गए अतिक्रमण और अधिरचना को हटाने की मांग की गई थी, जो कि श्रीकृष्ण विराजमान से संबंधित कटरा केशव देव मथुरा में सुन्नी सेंट्रल बोर्ड ऑफ वक्फ की सहमति से हुई थी।

मुख्य रूप से तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार द्वारा उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 लागू किया गया था जिसमें 15 अगस्त, 1947 को अस्तित्व में आने के साथ ही देश में सभी पूजा स्थलों की स्थिति को तय कर दिया था।

याचिका का नाम उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड; शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट; श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट और श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान प्रतिवादी के रूप में है। अब अयोध्या जन्मभूमि के ऐतहासिक फैसले के बाद हिन्दू समाज ने कानूनी लड़ाई के मार्ग से श्रीकृष्ण जन्मभूमि को पुनः प्राप्त करने का संकल्प लिया है। अब जिस तरह अयोध्या में मंदिर निर्माण शुरू हुआ है उसी तरह से कशी-मथुरा की बारी आ चुकी है जिसमें मुस्लिमों को अपना समर्थन करना चाहिए और कब्ज़े वाली ज़मीन पर हराम की मस्जिद को स्वतः ही हटाना देना चाहिए।

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