विश्लेषण : अर्नब गोस्वामी के पीछे क्यों पड़ी है उद्धव ठाकरे सरकार ?

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रिपब्लिक भारत टीवी और महाराष्ट्र सरकार के बीच की लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है। शुक्रवार को महाराष्ट्र की विधानसभा ने अर्नब गोस्वामी को नोटिस दिया, जिसमे दस मिनट के भीतर विधानसभा में उपस्थित होने का आदेश दिया गया था। अब ऐसा लगने लगा है कि प्रतिशोध की भावना से काम कर रही ये सरकार कायदे-कानून ही भूल चुकी है। महाराष्ट्र विधानसभा द्वारा रिपब्लिक भारत को चौथी बार नोटिस भेजा गया था जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसके बाद रिपब्लिक की ओर से इस नोटिस की टाइमिंग को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा पर आरोप लगाए गए हैं। अर्नब गोस्वामी को एक ही समय में दो समन भेजे गए थे। इसी दस मिनट में उन्हें एक थाने में भी हाजिरी देने जाना था।
चौथी बार नोटिस ज़ारी होने पर अर्नब गोस्वामी ने रिपब्लिक टीवी के शो, ‘पूछता है भारत’ पर उद्धव ठाकरे और सोनिया गांधी पर निशाना साधा। अर्नब गोस्वामी ने कहा, ‘आप मुझ पर हमला करेंगे तो अर्नब को क्या सोचकर रखा है, बैठा रहेगा, आइए उद्धव जी अटैक करो। दुबई वाला भाई आपके साथ है तो अटैक करो, मैं खुद को बचाने की कोशिश भी न करूं? मैं उस तरह का पत्रकार नहीं हूं।’अर्नब गोस्वामी ने आगे कहा कि वो 10 मिनट में कैसे विधानसभा पहुंच जाएंगे, उनके पास कोई उड़नखटोला नहीं है। उन्होंने कहा, ‘ मुझे बताइए उद्धव जी, संजय राउत जी, 2:50 बजे नोटिस मिलने के बाद कोई मनुष्य 3 बजे विधान सभा कैसे पहुंच सकता है। मैं उड़ कर आ जाता क्या? मैं किसी ‘सोनिया सेना’ के उड़नखटोले पर उड़कर आ जाता क्या ?

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शिवसेना के विधायक प्रताप सरनाइक विधानसभा में रिपब्लिक चैनल के खिलाफ मानहानि का प्रस्ताव रखा औ प्रस्ताव रखने के बाद विधानसभा में हंगामा हुआ और आधे घंटे के लिए काम रोक दिया गया। भारी हंगामें के बीच विधानसभा ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और नोटिस जारी कर दिया जिस से लग रहा है कि विधानसभा जल्दी ही अर्णव गोस्वामी के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू कर सकती है।प्रताप सरनाइक ने कहा, “मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रमुख शरद पवार के ख़िलाफ़ अर्नब गोस्वामी ने जिस भाषा का प्रयोग किया है, उसकी मैं निंदा करता हूं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर उद्धव ठाकरे और शरद पवार, दोनों की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास हुआ है। अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ सख़्त से सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए।
ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि रिपब्लिक चैनल ने सुशांत सिंह राजपूत खुदकुशी मामले में शुरू से ही महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा था। लगातार महाराष्ट्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया और उद्धव ठाकरे की चुप्पी पर भी सवाल किए जिस से महाराष्ट्र सरकार की बहुत फजीहत हुई तभी से महाराष्ट्र सरकार रिपब्लिक के पीछे पड़ गई। लगातार नोटिस और विभिन्न तरीकों से किसी भी चैनल को परेशान करना अभिव्यक्ति की आज़ादी का अपमान तो है ही साथ ही साथ मौलिक अधिकारों को नुकसान पहुंचता है। इसलिए महाराष्ट्र सरकार को बदले की भावना से कार्रवाई से बचते हुए जो सही है उसका साथ देना चाहिए।महाराष्ट्र सरकार नेएक बार में नहीं चौथी बार  नोटिस भेजा ,अर्नब को सिर्फ 10 मिनट में हाज़िर होने को कहा  महाराष्ट्र सरकार का चैनल और उसके संपादक के खिलाफ ये व्यवहार गलत ही नहीं सरासर अनुचित है क्योंकि अगर चैनल कुछ ग़लत कर रहा ही तो उसके लिए कोर्ट का रास्ता है लेकिन सरकार का खुद ही सारे निर्णय लेते हुए नोटिस पर नोटिस भेजना सरासर नाइंसाफी है।साथ ही एक प्राइवेट व्यक्ति नोटिस के लिए सदन के विशेषअधिकार का दुरूपयोग करना अलोकतांत्रिक एवं संविधान विरोधी है ।

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