बॉलीवुड की फिल्म सिटी होगी शिफ्ट? आमने-सामने उद्धव और योगी

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आर्थिक राजधानी मुंबई से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को उत्तर प्रदेश में शिफ्ट करने पर राजनीति शुरू हो गई है। गुरुवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा था कि वह मुंबई की हिंदी फिल्म इंडस्ट्री बॉलीवुड को बदनाम करने, उसे खत्म करने या कहीं और स्थानांतरित करने का कोई प्रयास बर्दाश्त नहीं करेंगे। बॉलीवुड पिछले कुछ समय से विवादों में घिरा हुआ है और ये बयान शायद इसीलिए सीएम उद्धव ठाकरे ने दिया है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि बॉलीवुड के चाहने वाले पूरी दुनिया में हैं। फिल्म इंडस्ट्री बड़े पैमाने पर रोजगार भी देती है। फिल्म इंडस्ट्री को खत्म करने या इसे कहीं और स्थानांतरित करने का कोई भी किसी भी तरह का प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ठाकरे के इस बयान के बाद राजनीति शुरू हो गई है। क्योंकि हजारों करोड़ रुपए की फिल्म इंडस्ट्री पर कौन एकाधिकार नहीं चाहेगा। जिस भी राज्य में फिल्म इंडस्ट्री जैसे उद्योग होते है वह लाखों लोगों को रोजगार तो मिलता ही है साथ ही साथ पर्यटन और टैक्स के मामले में भी वह राज्य बाकी राज्यों से आगे रहता हैं। कुल मिला कर जहां फिल्म इंडस्ट्री होगी वो राज्य फायदे में रहेगा ये आम धारणा और राजनीति की सोच है। अब जब उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिल्म इंडस्ट्री बनाने की घोषणा कर दी है तो देखा जा रहा है कि शायद मुंबई एसडब्ल्यू कुछ फिल्म प्रोडक्शन हाउस उत्तरप्रदेश की फिल्म सिटी में आए जाए क्योंकि बॉलीवुड में बनने वालीं 50-60% फिल्में उत्तरप्रदेश और बिहार की पृष्ठभूमि और उसके आसपास के इलाके में घूमती हैं ऐसे में उत्तरप्रदेश में फिल्म इंडस्ट्री आने से जहां एक और स्थानीय कलाकार आसानी से मिल जाएंगे वहीं दूसरी और फिल्म के बनाने का खर्चा भी 30% तक कम हो जाएगा।

दूसरी ओर इसका एक पहलू ओर भी है क्योंकि मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री शुरू से ही माफियाओं से पीड़ित रही है। चाहे फिल्मों के वितरण की बात हो, फिल्मों के निर्माण की बात हो, उसमें लगने वाले पैसे की बात हो, हीरो हीरोइनों के चयन की बात हो, सब में माफियाओं का बड़ा हस्तक्षेप रहा है।हाजी मस्तान, दाऊद इब्राहिम, अबू सलेम जैसे माफिया मुंबई फिल्म इंडस्ट्री पर राज करते रहे। अपने इशारों पर सभी को नचाते रहे हैं। मोनिका बेदी, मंदाकिनी जैसी हीरोइनों को उनके आगे नतमस्तक होना पड़ा। माफिया के सामने लेटने वाले बड़े नामों की लंबी फेहरिस्त है। ड्रग माफिया का बॉलीवुड में कैसा जाल है यह रिया चक्रवर्ती मामले में साफ-साफ दिख रहा है।

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योगी आदित्यनाथ की पहल से लॉ एंड ऑर्डर के मामले में उत्तर प्रदेश का परसेप्शन तीन सालों में काफी बदला है। योगी की अपराधियों के खिलाफ सख्त नीति ने संगठित अपराध की कमर तोड़ दी है। मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे माफिया का साम्राज्य ध्वस्त होता हुआ दिख रहा है। अधिकतर बड़े अपराधी या तो मुठभेड़ में मारे गए या प्रदेश छोड़कर भाग गए या जेल की सलाखों में सुरक्षित हो गए। हालांकि मुन्ना बजरंगी जैसा बड़ा अपराधी जेल के अंदर भी नहीं बच पाया।जाहिर है कि इससे यह उम्मीद बनी है कि यूपी की फिल्म सिटी योगी आदित्यनाथ की छत्रछाया में माफिया के डर से मुक्त रहेगा, बेखौफ रहेगा और नाजायज शोषण से बचकर एक साफ-सुथरी फिल्म इंडस्ट्री के निर्माण में योगदान कर सकेगा। सरकार प्रदेश में पहले से मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन पावर, सरकार द्वारा दी जा रही सहायता और बेहतर कनेक्टिविटी फिल्म सिटी के लिए बेहतर माहौल मुहैया करवाएगी।

ऐसे में फिल्म सिटी को लेकर उद्धव ठाकरे और योगी आदित्यनाथ आमने सामने हो गए है क्योंकि तमाम आरोपों और हालातों के बीच भी उद्धव ठाकरे चाहते है कि फिल्म इंडस्ट्री पर मुंबई और महाराष्ट्र का ही दबदबा बना रहे और योगी आदित्यनाथ चाहते है कि स्थानीय कलाकारों को तो काम मिले ही साथ ही फिल्मे भी यही बनने शुरू हो जाए जिस से अधिक लाभ राज्य सरकार को मिल सके। अब देखना यह होगा कि उत्तर प्रदेश की फिल्म इंडस्ट्री बनने के बाद कितने मुंबई के फिल्म प्रोडक्शन हाउस उठ कर उत्तर प्रदेश आते है।

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