अर्णब गोस्वामी के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार का वकील होगा कांग्रेसी कपिल सिब्बल

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कांग्रेस के नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल अब महाराष्ट्र सरकार की तरफ से कोर्ट में खड़े होंगे। मामला रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी के खिलाफ दायर किया गया है। जिसमें कपिल सिब्बल अब महाराष्ट्र सरकार की तरफ से जिरह करते दिखाई देंगे। सबसे कमाल की बात ये है की कपिल सिब्बल ये जिरह मुफ्त में नहीं कर रहे हैं बल्कि इसके लिए सिब्बल को दस लाख रुपए प्रति पेशी मिलेंगे। कपिल सिब्बल के साथ राहुल चिंटिस को भी 1.5 लाख रुपए प्रति पेशी मिलेंगे। महाराष्ट्र की उद्धव सरकार एक रिट पेटिशन पर इतनी बड़ी धनराशि कांग्रेस के नेता को देने जा रही है जबकि खुद महाराष्ट्र सरकार के पास सरकारी वकीलों की भरमार हैं। सॉलिसिटर जनरल, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल की एक लंबी चौड़ी लिस्ट होती है जिन्हे सरकारी खजाने से तनख्वाह मिलती है तो फिर इतनी बड़ी लिस्ट होने के बाद बाद भी कपिल सिब्बल कोर्ट में खड़े होंगे। इसका मतलब कही ये तो नहीं की सरकार को अपने ही सॉलिसिटर जनरल पर भरोसा नहीं है या फिर कुछ और मकसद है।

महाराष्ट्र की ‘महाविकास अघाड़ी’ सरकार के गृह मंत्रालय ने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की फीस के लिए फंड्स जारी करने के लिए आदेश भी दे दिया है। इस लिखित आदेश में साफ लिखा है कि प्रत्येक सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल को 10 लाख रुपए बतौर फीस दिए जाएँगे। सुनवाई और सुनवाई पूर्व होने वाले विमर्श के लिए ये रुपए दिए जाएँगे। ये मामला पालघर में हुई 2 संतों की हत्या से जुड़ा हुआ है। उस दौरान अर्नब गोस्वामी ने महाराष्ट्र सरका के साथ साथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए थे। इसके बाद उनके खिलाफ महाराष्ट् सहित देश भर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने दर्जनों FIR किए गए थे। अर्नब गोस्वामी ने अपने एक कार्यक्रम में सोनिया गाँधी को ‘एंटोनियो माइनो’ कह कर बुलाया था, इसके बाद उग्र कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनकी कार पर हमला भी किया था। जिसके बाद अर्नब महाराष्ट्र सरकार और कांग्रेस में और हमलावर हो गए थे।

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इन एफआईआर और याचिका में गोस्वामी के साथ 11 घंटे तक पूछताछ भी हो चुकी है। इन सब एफआईआर और याचिकाओं के बाद भी अर्नब ने बांद्रा में मजदूरों के जुटने पर भी सवाल उठाए थे और सवाल उठाने पर फिर से उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। नवीं मुंबई में ‘रिपब्लिक’ के एक पत्रकार को हिरासत में लेने का आरोप भी महाराष्ट्र पुलिस पर लगा था। हाल ही में आरोप लगा कि चैनल के एक अन्य पत्रकार प्रदीप भंडारी को भी मुंबई पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में लेने की कोशिश की थी। लगातार अर्नब गोस्वामी vs महाराष्ट्र सरकार का मामला दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। सरकार लगातार करवाई कर रही है। पिछले दिनों अर्णव पर महाराष्ट्र विधानसभा ने भी सम्मन भेजा था। शायद यही वजह है कि अर्णब ने कहा होगा कि मुझे कुछ हुआ तो ये लोग होंगे ज़िम्मेदार होंगे।अब ये सारा मामला न्यायपालिका में।चला गया है। देखना होगा कोर्ट में इस मसले पर क्या होगा।

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