डिजिटल मीडिया में FDI सीमा नियम आने के बाद हफपोस्ट इंडिया की अपनी दुकान बंद

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विदेशी न्यूज़ वेबसाइट हफपोस्ट इंडिया 24 नवंबर से अपने ऑपरेशन्स को बंद कर रहा है। इसकी वेबसाइट पर एक घोषणा में लिखा गया है, “24 नवंबर से हफ़पोस्ट इंडिया अब कंटेंट प्रकाशित नहीं करेगा। अधिक महान वैश्विक कंटेंट के लिए, कृपया HuffPost.com पर जाएं। हम आपके समर्थन और पाठकों को धन्यवाद देते हैं। ”

हफपोस्ट इंडिया की वेबसाइट

“मेरे पास अपने शुरुआती वर्षों में हफ़पोस्ट को एक प्रमुख समाचार आउटलेट में विकसित करने की यादें हैं, लेकिन बज़फीड (Buzzfeed) इस अधिग्रहण को कर रहा है क्योंकि हम हफ़पोस्ट के भविष्य में विश्वास करते हैं और आने वाले वर्षों के लिए मीडिया परिदृश्य को परिभाषित करने के लिए इसे जारी रखने की क्षमता है” बज़फीड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोनाह पेरेटी ने एक बयान में कहा। पेरेटी 15 साल पहले हफपोस्ट के सह-संस्थापकों में से एक थे। अधिग्रहणसौदे के हिस्से के रूप में, वेरिज़ोन ने बज़फीड में अल्पमत हिस्सेदारी भी हासिल कर ली।

यह निर्णय बज़फ़ीड द्वारा बाद की मूल कंपनी वेरिज़ोन से हफ़पोस्ट का अधिग्रहण करने के कुछ दिनों बाद आया है। यह स्पष्ट नहीं है कि हफ़पोस्ट इंडिया का दुकान बंद करने का निर्णय विलय से संबंधित है या नहीं। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित नए नियमों के अनुसार, डिजिटल न्यूज़ मीडिया में एफडीआई 26% पर निर्धारित हुआ है। इस कदम का उद्देश्य “भारत के घरेलू मामलों में विदेशी प्रभाव और दखल को सीमित करना, समाचार साइटों में चीनी और अन्य विदेशी फंडिंग की जाँच करना और “सभी मीडिया के लिए एक स्तरीय कम्पटीशन का मौहालबनाना” है।

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यह नोट करना उचित है कि 16 नवंबर को, सरकार ने न्यूज़ एग्रीगेटर्स और डिजिटल मीडिया की कंपनियों को एक महीने के भीतर विदेशी निवेश के संबंध में उनके अनुपालन की स्थिति के बारे में जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा था। 26% से अधिक वाली संस्थाओं को 15 अक्टूबर, 2021 तक विदेशी निवेश को 26% तक नीचे लाने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से अनुमोदन लेना होगा। नए नियमों में यह भी कहा गया है कि कोई भी संस्था जो नया विदेशी निवेश लाना चाहती है उसे केंद्र सरकार से पहले अनुमति लेनी होगी।

हफ पोस्ट इंडिया हमेशा से ही विरोधाभाषी और पत्रकारिता के सिद्धांतो के विरुद्ध कृत्यों में लिप्त रहा है। स्क्रॉल, दा वायर, दा क्विंट जैसी अन्य भारत विरोधी और मोदी सरकार विरोधी न्यूज़ वेबसाइट्स भी विदेशी चंदो से चलती है और अब उन पर भी नकेल लगाने की बारी आ चुकी और विदेशी निवेश (FDI) को सीमित करने वाले नियम को लाने के बाद ऐसा करने में देश की सरकार को आसानी होगी।

हफ पोस्ट इंडिया पर अक्सर देश की छवि की ख़राब किये जाने वाले लेख, समाचार प्रकाशित किये जाते रहे थे जिनका यथार्थ से कोई वास्ता नहीं था। सच्चाई के नाम पर केवल मोदी सरकार का विरोध करना इस वेबसाइट का काम रहा है।

हफ पोस्ट कभी अपने ही ऑथर और लेख को डिलीट कर देता है तो कभी तारीख फ़तेह जैसे मशहूर लोगों के बारे में फेक न्यूज़ पब्लिश करता है जिससे वीडियो गायब हो जाता है। 2011 में विसुअल आर्ट सोर्स ने अपने कंटेंट रइटर्स की पेमेंट रोक दिए जाने के बाद विरोध में काम बंद कर दिया था और साल 2018 तक हफ पोस्ट ऐसे ही ब्लॉगर्स और रइटर्स से मुफ्त में काम लेता रहा। ऐसे में भारत में एजेंडे वाली दुकान बंद हो जाने पर हफ पोस्ट इंडिया अब अतीत का साया बनकर रह जाएगा और यह एक अच्छी खबर है।

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