भारतीय मूल के डॉक्टर गौरव शर्मा ने न्यूजीलैंड में ली संस्कृति भाषा में शपथ, देश को दुनिया के सामने किया गौरवानवित

ट्रेंडिंग प्रमुख खबरें

भारतीय मूल के डॉक्टर गौरव शर्मा ने न्यूजीलैंड के वेलिंगटन स्थित संसद भवन में संस्कृत भाषा में शपथ क्या ली तो वामपंथियों ने उन्हें घेर लिया। अक्टूबर में डॉक्टर गौरव ने हैमिल्टन वेस्ट सीट से लेबर पार्टी से चुनाव लड़ कर भारी मतों से जीत हासिल की थी। जब डॉ गौरव ने सांसद के रूप में न्यूजीलैंड में संस्कृत भाषा में शपथ ली तो उनका वीडियो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल होने लगा। इससे हम भारतीयों को तो गर्व हुआ ही लेकिन साथ ही साथ कुछ अवांछित तत्वों ने इसका विरोध भी किया।

विदेशी संसद में संस्कृत भाषा में शपथ लेने वाले वह दुनिया के पहले सांसद और दूसरे राजनेता है। इसके साथ ही गौरव अब पूरी दुनिया में चर्चा का केंद्र बन गए हैं।

बता दें विदेशी भूमि पर सबसे पहले संस्कृत में शपथ सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद “चान” संतोखी ने ली थी। उन्होंने गत 16 जुलाई को संस्कृत भाषा में राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। उनके बाद अब डॉ गौरव ने यह अनूठा कदम उठाया है।

डॉ गौरव भारत के हिमाचल प्रदेश से तालुकात रखते हैं। डॉ गौरव पहले ऐसे भारतीय हैं, जिन्होंने न्यूजीलैंड की धरती पर अपनी धरोहर यानी संस्कृत भाषा में शपथ ग्रहण की है। डॉ गौरव के पिता राज्य बिजली बोर्ड में एसडीओ के पद पर तैनात थे लेकिन उन्होंने नौकरी छोड़कर विदेश जाने का फैसला किया और विदेश चले गए थे। संस्कृत में शपथ लेकर उन्होंने भारत को पूरे विश्व के सामने गौरवान्वित किया है।

एक ट्विटर यूजर ने डॉ. गौरव शर्मा से पूछा कि उन्होंने हिंदी में शपथ क्यों नहीं ली तो उन्होंने कहा कि, “सभी को खुश करना कठिन है इसलिए मैंने संस्कृत में शपथ लेने का फैसला किया। पहले सोचा था कि हिंदी में शपथ लूं, लेकिन तब मेरी मातृभाषा (पहाड़ी) या पंजाबी को लेकर सवाल उठा। संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं की जननी है, इसलिए मैंने शपथ के लिए संस्कृत को चुना।”

 

Sharing is caring!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *