आखिर क्यों उग्र हुआ किसान आंदोलन?

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केंद्र सरकार के नए संशोधित कृष कानून बील के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान गुरुवार और शुक्रवार को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। यह आंदोलन धीरे-धीरे और उग्र होता चला जा रहा है। किसान दिल्ली चलो मार्च निकाल रहे हैं इस मार्च को रोकने के लिए हरियाणा और पंजाब सरकार ने तो अपने बॉर्डर सील कर दिए हैं। लेकिन फिर भी किसानों में इतनी एकजुटता है कि ना तो दिल्ली ना केंद्र ना पंजाब ना हरियाणा कोई भी सरकार उनके आंदोलन को तनिक सा भी नरम करने में कामयाब नहीं हो पाई हैं।

आखिर किसान इतने गुस्से में क्यों है इसके पीछे की वजह क्या है क्यों किसान इतना बड़ा आंदोलन कर रहे हैं क्या किसानों को यह डर लग रहा है कि मोदी सरकार ने जो बिल पारित किया है उससे उनको समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा साथ ही साथ बड़ी – बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां उन पर अपना धौंस चलाएंगी?

जो सबसे बड़ा डर किसानों को सता रहा है वह है न्यूनतम समर्थन मूल्य का यानी एमएसपी (MSP- Minimum Support Price) के खत्म होने का। लेकिन केंद्र सरकार ने किसानों को यह आश्वासन दिया है कि एमएसपी को खत्म नहीं किया जा रहा है बल्कि जो फसलें वह अपने राज तक ही भेज सकते थे अब उनके लिए मंडी से बाहर कभी रास्ता खोल दिया गया है।

सरकार ने अपने बिल में मंडियों को तो खत्म करने की बात कही है लेकिन दिल में इस तरह का कोई नोट नहीं लिखा है। किसानों को डर है कि कहीं मंडे को खत्म कर दिया जाए इसी का अंदाजा लगाकर किसान डरे हुए हैं। किसानों का मानना है कि मनिया बचेगी तभी तो किसान उसमें एमएसपी पर अपनी उपज बेच पाएंगे। लेकिन केंद्र सरकार ने साफ साफ कहा है कि एमएसपी को खत्म नहीं किया जा रहा है।

केंद्र सरकार ने जिन किसान बिलों को संशोधित किया है उसमें ऐसी कोई भी बात नहीं कही गई है जो किसानों के हित में ना हो। लेकिन कांग्रेस शासित पंजाब सरकार ने किसानों को गुमराह करने का काम किया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर सिर्फ और सिर्फ पंजाब और पंजाब से सटे हरियाणा के किसान ही इस आंदोलन में क्यों शामिल हो रहे हैं क्यों बाकी अन्य राज्यों के किसानों को डर नहीं है? अगर बाकी अन्य राज्य के किसानों को डर है तो उनको भी इस आंदोलन में शामिल होना चाहिए लेकिन शायद बाकी राज्यों के किसान केंद्र सरकार की बातों को समझ गए हैं या कहें उन उन तक केंद्र सरकार की बातों को सही से पहुंचाया गया है लेकिन पंजाब मैं शायद ऐसा नहीं हुआ है अगर ऐसा हुआ होता किसानों को सही से जानकारी मिली होती तो किसान इस बिल का विरोध नहीं करते।

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