सुप्रीम कोर्ट में केरल की महिलाओं ने दायर कि याचिका बोली, ‘सेक्स करने को कहते हैं पादरी’ याचिका SC ने स्वीकारी

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सुप्रीम कोर्ट में 5 ईसाई महिलाओं ने याचिका दायर की है जिसमें उन्होंने पादरी पर गंभीर आरोप लगाए  हैं। 8 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने केरल की ईसाई महिलाओं की रिट याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। इस याचिका में मालंकारा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च में अनिवार्य कन्फेशन की परम्परा को चुनौती दी गई है। याचिका को स्वीकार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य  याचिकाकर्ता को याचिका में संशोधन कर और नए फैक्स आलोक में लाने की अनुमति भी दे दी है।

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याचिकाकर्ताओं के वकील से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि वह इस मामले को लेकर केरल हार्ड कोर्ट क्यों नहीं जाते इसके जवाब में याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि सबरीमाला जजमेंट में ऐसे सवाल उठ चुके हैं जिस पर 9 सदस्य पीठ सुनवाई कर भी रही है इसलिए ऐसे विचाराधीन मामलों में हाई कोर्ट फैसला नहीं सुना सकती है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कन्फेशन की एवज में पादरी उनसे यौन संबंध करना चाहते हैं यानी सेक्स करने को कहते हैं।

याचिका में महिलाओं की तरफ से कहा गया है कि उन्हें अपने चुने हुए पादरी के समक्ष भी कन्फेशन करने दिया जाए साथ-साथ महिलाओं के द्वारा यह भी कहा गया है कि ईसाई महिलाओं के लिए कन्फेशन अनिवार करना असंवैधानिक है क्योंकि पादरियों द्वारा इसे लेकर ब्लैकमेल करने की भी घटनाएं सामने आती रही है और अभी रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर भारत के अटॉर्नी जनरल केसी वेणुगोपाल से भी प्रतिक्रिया माँगी है।‌

धर्म की आड़ में अपने हवस को पूरा करने के लिए ऐसे ढोंगी ना जाने भारत माता की धरती पर कैसे पैदा हो जाते हैं। अगर किसी भी पादरी, संत या मौलाना के खिलाफ ऐसे घिनौने अपराध सिद्ध हो जाते हैं तो उन्हें मौत की सजा सुना देनी चाहिए ताकि कोई भी धर्मगुरु अपने भक्तों के साथ ऐसा व्यवहार करने से डरे।

ऐसा ही कुछ मामला 2018 में आया था तब केरल हाईकोर्ट ने कन्फेशन को हटाने के लिए दायर की गई याचिका को रद्द करते हुए कहा था कि जब कोई किसी खास धर्म को मानता है तो इसका अर्थ है कि वह इसके अंतर्गत आने वाले नियम कानूनों को भी स्वीकार करता है।

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