ममता बनर्जी श्री राम

दीदी से नहीं सहे गए “जय श्री राम” के नारे, विरोध में कार्यक्रम को संबोधित करने से किया इनकार

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का गुस्सा देखने को मिला।यहां पर उन्होंने भाषण देने से इनकार कर दिया. दरअसल, ममता बनर्जी जब मंच पर भाषण देने पहुंचीं तो नारेबाजी शुरू हो गई. ममता बनर्जी ने कहा कि किसी का अपमान करना ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा ‘मैं प्रधानमंत्री जी की आभारी हूं, कल्चरल मिनिस्ट्री की आभारी हूं कि आप लोगों ने कोलकाता में प्रोग्राम रखा लेकिन किसी को आमंत्रित करके, अपमान करना शोभा नहीं देता। मैं इस पर विरोध जताते हुए यहां नहीं बोलूंगी. जय हिंद, जय बांग्ला.’ कार्यक्रम में मौजूद लोगों की नारेबाजी से नाराज ममता बनर्जी भाषण देने से इनकार करते हुए सीधे अपनी कुर्सी पर आकर बैठ गई।

बाद में बारी मोदी की भी आई, लेकिन उन्होंने इस वाकये पर एक शब्द तक नहीं बोला। इससे पहले विक्टोरिया मेमोरियल में नेताजी पर डाक टिकट और सिक्के का विमोचन किया गया। साथ ही आजाद हिंद फौज के सदस्यों का सम्मान भी किया गया। पूरा कार्यक्रम करीब तीन घंटे तक चला। इस दौरान सांस्कृतिक आयोजन भी हुए।लेकिन, साथ बैठने के बावजूद दोनों के बीच बातचीत नहीं हुई।

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता और हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने ट्वीट कर कहा, ‘जय श्री राम का नारा ममता बनर्जी के लिए वैसा ही जैसे सांड के लिए लाल कपड़ा होता है।

प्रभु श्री राम के नाम से डरने लगी हैं ममता बनर्जी

भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि कार्यक्रम के दौरान श्री राम का नारा से उन्हें क्या समस्या है। मुझे लगता है ममता जी के सम्मान में यह नारा लगाया था। इस तरह से आधिकारिक कार्यक्रम में विवाद करना उनकी हताशा को दिखाता है।

सीएम को किसी नारे पर प्रतिकूल प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए थी। चाहे वह ‘जय हिंद’ हो या ‘जय श्री राम’। यह कोई राजनीति करने का दिन नहीं है। यह जश्न मनाने का दिन है, यह भारतीय राष्ट्रीय सेना के सैनिकों और शहीदों को श्रद्धांजलि देने का दिन है।

बंगाल चुनाव के नजरिये से देखें तो 23 जनवरी का यह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर संपन्न हुआ कार्यक्रम की राजनीतिक अहमियत बहुत है. बंगाल चुनाव में एक ओर जहां बीजेपी बंगाली अस्मिता से खुद को जोड़ने की कोशिश में लगी है तो वहीं टीएमसी खुद को बंगाल की संस्कृति की रक्षक बता रही है.

वहीं जय श्री राम’ के नारे को लेकर BJP और टीएमसी के बीच पहले ही सियासी जुबानी जंग देखने को मिली है. बीजेपी की रैलियों में अक्सर ‘जय श्री राम’ के नारे सुनाई पड़ते हैं और इसे शक्ति प्रदर्शन के तौर पर पेश किया जाता है.

तो क्या दीदी से बीजेपी का शक्ति प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं हो रहा।बंगाल की सियासी शख्सियतों को लेकर BJP और तृणमूल कांग्रेस में अदावत पहले भी देखने को मिली थी. गुरु रबींद्र नाथ टैगौर द्वारा स्थापित विश्व भारती विश्वविद्यालय के सौ साल पूरे होने पर आय़ोजित कार्यक्रम को लेकर भी ऐसा हुआ था. बीजेपी ने आरोप लगाया था कि ममता ने इस समारोह में शामिल न होकर रबींद्र नाथ टैगौर का अपमान किया है. हालांकि ममता ने दावा किया कि उन्हें जानबूझकर समारोह का न्योता ही नहीं दिया गया।

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