कृषि कानून वापस

कृषि कानून वापस होने पर अब उत्तरदायित्व राज्य सरकारों पे

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  • प्रमोद शुक्ल

केंद्र सरकार ने बहुत ही‌ गरिमापूर्ण तरीक़े से कृषि क़ानून वापिस ले लिया है। क्योंकि किसानों की आड़ लेकर कुछ लोग करीब एक साल से आढ़तियों, बिचौलियों और दलालों के लिए काम कर रहे थे,, आंदोलन कर रहे थे। न्यायपालिका भी बहुत लंबे समय से इस मुद्दे पर स्पष्ट रूप से अपनी कोई दो टूक राय नहीं जाहिर कर पा रही थी। तमाम सारे विरोधी दल यह प्रदर्शित करने में लगे थे कि केंद्र सरकार किसानों के हित में काम नहीं कर रही है। कॉग्रेस सहित अनेक विरोधी दल यह प्रचारित करने में लगे रहे कि इन कानूनों से किसानों का भला नहीं हो रहा है।

लोकतंत्र का सम्मान करते हुए नरेंद्र मोदी ने अपने कदम वापस जरूर ले लिये हैं परंतु अपना मैसेज वह काफी हद तक आम किसानों तक पहुंचाने में सफल रहे हैं कि किसानों के हित में केंद्र सरकार ने जो कानून बनाया था, अन्य दल उसका किस तरह से विरोध करने में लगे रहे लगातार।


मीडिया क्या कर रहा है ? समाज एवं देश पर गहराता उसका प्रभाव कुछ बताता है !


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लगता है कि यही कानून किसी नए रूप में, नयी पैकेजिंग के साथ अब कुछ राज्य सरकारें लागू करेंगी, खासतौर से जहां भाजपा की सरकारें हैं। हो सकता है कि कुछ गैर भाजपाई सरकार भी इसे नए स्वरूप में लागू करें। इससे कांग्रेस और कुछ अन्य दलों का विरोध का मुद्दा खत्म हो जाएगा। यह भी संभव है कि आम किसान जहां कांग्रेस की सरकार है वहां सवाल उठाएं कि किसानों के हित वाला यह कानून वहां क्यों नहीं लागू हो पा रहा है। अब राज्य सरकारों पे उत्तरदायित्व आ गया है,,,

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