पीएम नरेंद्र मोदी का ईमानदारी वाला गुण

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  • प्रमोद शुक्ल


ईमानदारी और कुटिलता जैसे गुण एक दूसरे के विपरीत हैं। किसी एक ही व्यक्ति में इन दोनों गुणों का एकसाथ होना दुर्लभ होता है।

कोई भी व्यक्ति यदि ईमानदार होता है तो वह सरल होता है। उसमें कुटिलता का अभाव होता है। जैसे कि लाल बहादुर शास्त्री जी ईमानदार थे, इसीलिए सरल थे। राजनीति की क्रूरता और कुटिलता से अनभिज्ञ थे। शायद यही कारण था कि विदेशी धरती पर उनकी मौत संदेहात्मक परिस्थितियों में हुई,, न तो उनके शव का पोस्टमार्टम हो पाया और न ही आज तक कोई जांच आयोग गठित हुआ।

यदि कोई ‘कुटिल’ होता है तो उसमें ईमानदारी का नामोनिशान नहीं होता है, ऐसे तमाम नेताओं को जानते हैं आप….

अतीत में इन दोनों गुणों का दुर्लभ संयोग सिर्फ देवकी पुत्र #श्रीकृष्ण और #आचार्य_कौटिल्य में देखा गया था। १५वीं सदी में यह असाधारण संयोग #छत्रपति_महाराजा_शिवाजी में भी देखा गया। जो अपने हिंदुत्व के प्रति पूर्णतः ईमानदार थे और जिनके पास #औरंगज़ेब से निपटने के लिए उससे ज़्यादा कुटिलता भी थी।

मानवता और सनातन का सौभाग्य है कि आज मोदी के रूप में इन दो विपरीत दुर्लभ गुणों वाला व्यक्तित्व एक बार पुनः दुनिया को उपलब्ध है।

इन दोनों ही दुर्लभ और एक दूसरे के विरोधाभासी गुणों को अपने व्यक्तित्व में लगातार कैसे संजोए हुए हैं #नरेंद्र_मोदी…? इसे समझने के लिए उनकी कुंडली में बैठे ग्रहों को समझना जरूरी होगा। उन ग्रहों के तालमेल से हम आसानी से समझ सकते हैं की इन दुर्लभ गुणों के अद्भुत संयोजन वाला यह अनोखा व्यक्तित्व पूरी दुनिया और मानवता के लिए क्या कोई ऐतिहासिक भूमिका निभाने की तैयारी में है ?

रूस और यूक्रेन का युद्ध अब भयावह मोड़ पर पहुंच चुका है,, परमाणु बमों से होने वाले भीषण विध्वंस की आहट से दुनिया विचलित हो रही है। सवाल हर तरफ उठ रहे हैं कि मोदी जैसा विराट व्यक्तित्व अपनी दूरदर्शिता और सभी का विश्वास जीतने वाली कूटनीति से इस दुनिया को कितना बचा पाएगा ?

आइए, मोदी जी की कुंडली से इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करते हैं एक नये दृष्टिकोण से….

तुला लग्न और वृश्चिक राशि वाली मोदी जी की यह जो कुंडली आप देख रहे हैं इसमें एक बात ध्यान रखिएगा कि यह #चलित_कुंडली है, जिसमें मंगल लग्न में दिख रहा है। जबकि वास्तव में यह मंगल वृश्चिक राशि का होकर चंद्रमा के साथ दूसरे स्थान में बैठा हुआ है। दरअसल चलित कुंडली का प्रभाव ज्यादा है मोदी जी के जीवन पर… यह जो मंगल आप लग्न में देख रहे हैं यह स्वगृही मंगल लग्न में बहुत ही मजबूत हो गया है। बृहस्पति की दृष्टि लग्न और मंगल तक पहुंच जाने के कारण मंगल को और भी ज्यादा विशालता मिल जाती है।

तुला लग्न में बृहस्पति हालांकि कारक नहीं होता है, बावजूद इसके इस गुरु की दृष्टि से जातक को मजबूती कैसे मिल गई है ? यह सवाल ज्योतिष का कोई भी जानकार आसानी से पूछ सकता है… इस प्रश्न का जवाब मिलते ही इस कुंडली की विशिष्टता का भान आपको हो जाएगा।

दरअसल कुंडली में ग्रहों के अंशों को जब बारीकी से देखेंगे तो पाएंगे की शुक्र शनि और बुध एकादश भाव में जो राजयोग बना रहे हैं, इन ग्रहों की शुभ दृष्टि छठें घर और राहु पर भी पूरी पूरी पहुंच रही है क्योंकि इनके अंश ऐसी परिस्थिति बना रहे हैं। राहु 5 डिग्री का है जबकि शनि 29 डिग्री का है और बुध जीरो डिग्री का कन्या राशि पर है। (

ध्यान रहे कि यह चलित चार्ट है) इन ग्रहों की दृष्टि छठें घर और राहु पर होने के कारण #शत्रुहंता_योग बहुत ही प्रबल हो गया है। उधर, दूसरी तरफ दसवें घर का स्वामी चंद्रमा नीच का होकर संचित ज्ञान के स्थान (दूसरे घर) में मंगल के साथ बैठा है। मंगल इस चंद्रमा का नीच भंग करते हुए एक अति विशिष्ट राजयोग बना रहा है, यही राजयोग एक चायवाले को जमीन से उठाकर विश्वनेता होने की ऊंचाई तक पहुंचाता है।


भारतीय पत्नी तब तक सुखी नहीं रह सकती……..

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महत्वपूर्ण बात यह है कि छठें घर अर्थात शत्रु स्थान में बैठा हुआ राहु चंद्रमा पर कुदृष्टि डालकर उसे जितना ही कमजोर करने की कोशिश करता है, मंगल के कारण नीचभंग राजयोग उतना ही ज्यादा प्रबल होता चला जाता है।

ग्रहों के कंबीनेशन कुछ ऐसे हैं कि राहु की कुदृष्टि (विधर्मियों के विरोध) के कारण चंद्रमा लगातार जितना कमजोर होता है चंद्रमा का यह नीचभंग राजयोग उतना ही प्रबल होता चला जाता है। कहने की आवश्यकता नहीं है कि चंद्रमा दसवें स्थान का स्वामी होने के कारण मोदी जी की सत्ता उतनी ही मजबूत होती चली जाती है।

उनकी ईमानदारी का जहां तक प्रश्न है तो चलित चार्ट में स्वगृही मंगल का लग्न में होना और गुरु से दृष्ट होना ही इस बात का प्रमाण है कि यह व्यक्ति निहायत ही ईमानदार है, अपने देश, धर्म और सनातन के प्रति पूरी तरह से समर्पित है।

वहीं दूसरी ओर शुक्र शनि बुध और सूर्य द्वारा छठें घर में बैठे राहु को देखना इस बात का प्रमाण है कि यह व्यक्ति कितना भी ईमानदार हो परंतु यह #भोला नहीं है, इसके अंदर राजनीति और कूटनीति के वह सारे गुण समाहित हैं जिसके आधार पर समय और जरूरत के मुताबिक कुटिलता भी बढ़ती चली जाती है। अर्थात सामने वाला जितना कुटिल होगा यह जातक उतनी ही कुटिलता के साथ अपने शत्रुओं को जवाब देने में सक्षम है, वह शत्रु चाहे खुद की पार्टी के हों, विरोधी दल के हों या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर के विदेशी हों।

इसी अक्टूबर महीने से मोदी जी की कुंडली के अनुसार उनकी मंगल की महादशा प्रारंभ होने जा रही है। मंगल नेता होता है, नेतृत्वकर्ता होता है, और मोदी जी का मंगल लग्न में इतना प्रचंड है कि मंगल की इस महादशा के दौरान जाहिर है कि उनके नेतृत्व की विशालता और ज्यादा विस्तारित होगी।

हालांकि आज भी वह पूरी दुनिया में बहुत सम्मान के साथ देखे जाते हैं और माना जाता है कि दुनिया के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता आज मोदीजी ही हैं। मंगल की महादशा आने के बाद उनका नेतृत्व और ज्यादा स्वीकार किया जाएगा पूरी दुनिया में,, देखते रहिए… मोदी जी की महत्वपूर्ण भूमिका अब और ज्यादा प्रभावशाली होने जा रही है विश्व की राजनीति में।

 

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