भारतीय पत्नी

भारतीय पत्नी तब तक सुखी नहीं रह सकती……..

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  • सनी राज वत्स


भारतीय पत्नी तब तक सुखी नहीं रह सकती जब तक उसका पति अपनी मां से अत्यधिक लगाव रखेगा।

महिला के सम्मान , बराबरी, राय को तब तक स्थान नहीं मिलेगा जब तक बेटा मां के पल्लू से लटका रहेगा और मां के महिमामंडन के चलते स्वतन्त्र रूप से कुछ न करेगा।

हमारे समाज में हर पीढ़ी प्यार और सम्मान की भूखी रहती है जिसमें बहुत हद तक पितृसत्ता और उसके बाद मां योगदान देती है जिस कारण सही समय पर सही प्रेम और व्यवहार न मिल पाने से उत्पन्न कुंठा जीवन में हर पड़ाव पर हर रिश्ते का तालमेल बिगाड़ती चलती है।

जिस उम्र में मां बाप का दोस्त होना ज़रूरी होता है उस उम्र में मां बाप लगभग डिक्टेट करेंगे या गोद में चिपका कर रखेंगे। इस कारण बच्चे की मनोवृत्ति या तो अति प्रेमी होगी या अति हताश!

फ़िर जिस उम्र में उसके जीवन में कोई साथी आएगा तब माता की असीम ममता जागेगी कि मेरा बेटा तो अब पराया हो गया….. अब ऐसे में राजा बेटा भी अपनी बरसो सताई हुई मां की पीड़ा को ज़्यादा महत्व देगा और नई आई महिला बस दब कर रह जाएगी। और जो बेटा सत्य कहेगा, ख़ुद के पैर पर खड़ा होगा, न्यायप्रिय होगा, वह राजा बेटा नहीं कहलाएगा। इसी तरह मां से लेकर बहु और आने वाली पीढ़ी के चिराग तक सब प्रेम के भूखे रह जाते हैं।


ऐसे भी कोई जाता है…. राजू श्रीवास्तव जी ?

ऐसे भी कोई जाता है…. राजू श्रीवास्तव जी ?


मैंने बेटियों पर केंद्र करके पोस्ट इसलिए नहीं लिखी क्योंकि बेटी अपने घर को छोड़ कर जाती है तो वहां सारे समीकरण बदलते हैं। हालांकि बेटियों का मां और मायके से अधिक संबंध रखना भी शादी के बाद ही शुरू होता है जिसका कारण भी बचपन से चला व्यवहार होता है लेकिन वह एक दूसरा मसला है, उसमें जिस लड़के से शादी होती है उसके किरदार का भी एक बड़ा महत्व है और उसके किरदार पर फ़िर से मां की pampering का रोल अहम है, इसलिए बात वहीं आ कर पहुंचती है।

मां बाप का unconditional love, over protective nature, justification कभी अगली पीढ़ी के रिश्तों को शांतिपूर्वक उभरने नहीं देते और फ़िर यही कुंठित दंपती किसी न किसी रूप में अपनी अगली पीढ़ी को स्वतंत्र विकसित होने में बाधा डालेंगे और यही चक्र चलता रहेगा और महिलाओं का सम्मान ताक पर रखा जाता रहेगा। समाधान सबको मालूम है पर……….

“भई हम मां बाप हैं, mutual fund का निवेश है हमारी औलाद”

 

 

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