कृषि कानून वापसी

कृषि कानून वापसी : मोदी सरकार ब्लैकमेल हुई या कोई मास्टरस्ट्रोक है ?

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  • आदित्य मिश्र

कृषि कानून वापसी : लगभग डेढ़ साल के जद्दोजहद के बाद सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिया है।प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुपर्व पर अपने विशेष संबोधन में यह घोषणा की।

ढाई दर्जन से अधिक दौर की बातचीत के बाद भी सरकार किसानों को समझाने में अक्षम रही पीएम मोदी ने भी अपने संबोधन में इस बात को स्वीकार किया। सुप्रीम कोर्ट का भी लगातार दबाव था किसान यूनियन के लोग भी सरकार के खिलाफ जा रहे थे और देश का एक बड़ा मीडिया वर्ग भी सरकार को कई सवालों को लेकर घेर रहा था।

इस साल की शुरुआत में 26 जनवरी को दिल्ली में किसानों ने लाल किले पर हमला किया जहां सुरक्षा में तैनात लगभग डेढ़ सौ जवान इसमें काफी गंभीर रूप से जख्मी हुए एक किसान की मौत भी हो गई। दिल्ली से सटे पंजाब और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर भी किसानों ने आंदोलन जारी रखा और इस दौरान इन क्षेत्रों में काम करने वाले लोग और इन क्षेत्रों से आने जाने वाले लोगों को काफी परेशानी हुई है। आंकड़ों को देखें तो पाएंगे कि लगभग एक लाख करोड़ से अधिक का व्यापारिक नुकसान किसान इस आंदोलन के दौरान हुआ है।

कृषि कानून वापसी : मोदी के इस घोषणा में सरकार की आंतरिक कमजोरी और प्रधानमंत्री मोदी की निराशा साफ झलक रही थी। लेकिन, विचार करने की बात है कि सरकार कहां कमजोर पड़ी और इस तरह के निर्णय क्यों लेने पड़े?


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जब सरकार पूरी मजबूती और तटस्थता के इस कानून को लेकर आई थी और लगभग डेढ़ वर्षो में तमाम चुनौतियों, विवादों कानूनी दावपेंचो के बाद भी इसको बरकरार रखा तो फिर क्या मजबूरी रही होगी इन कानूनों को वापस लेने की?

जबकि पीएम ने आज भी यह दावा किया ये तीनो कानून किसानों के हित में थी। क्या सरकार कुछ सौ किसानों से ब्लैकमेल हो गई? सवाल यह भी होगा कि क्या उत्तर प्रदेश और पंजाब के चुनाव को देखते हुए तो यह फैसला नहीं लिया गया? सवाल यह भी कि क्या ये तीनों कानून किसानों के हित में ही थे? आखिरकार सरकार 1% किसानों के सामने झुक गई जो इन कानूनों का विरोध कर रहे थे लेकिन 99% किसानों के बारे में नहीं सोचा जो या तो सरकार के इस निर्णय से खुश थे या इससे उनका कोई लेना-देना नहीं था इसलिए चुप थे।

यह निर्णय उन लोगों के साथ एक अन्याय भी है जिन्होंने इसमें सरकार का खुलकर समर्थन किया था। अंत में, जो हुआ उसे स्वीकार करना चाहिए चुकीं यह एक विवाद के समाधान और अंत के लिहाज से महत्वपूर्ण निर्णय है। उम्मीद करते हैं किसान अब शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन को समाप्त करेंगे और फिर से अपने खेतों की ओर लौटेंगे। उम्मीद यह भी की जाएगी कि सरकार इस तरह से फिर दोबारा कोई नियम लेकर नहीं आए जिससे ब्लैकमेल किया जाए और वह कमजोर पड़ जाए।

लेखक (indianchsnakya.co.in) वेबसाइट से जुड़े विशेषज्ञ एवं प्रमुख सदस्य है

 

 

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