महात्मा गाँधी हिंसा

अहिंसा का पुजारी, हिंसा का व्यापारी, लाया महामारी ….ऐसा है महात्मा गाँधी अत्याचारी !

प्रमुख विषय राजनीति विचार
  • अश्विनी त्रिपाठी

 

अहिंसा का पुजारी, हिंसा का व्यापारी, लाया महामारी ….ऐसा है महात्मा गाँधी अत्याचारी ! कैसर-ए-हिन्द से चला सिलसिला, भारत के हजारों नागरिकों को अंग्रेजी सेना में भर्ती करा के मरवा देने पे थम जाता तो भी कम ही रहता ऊपर से जलियांवाला बाग काण्ड के महज एक वर्ष बाद ही उसी अंग्रेजी सेना में लोगों को भर्ती करने का अभियान चलाने में शर्म तक नहीं आयी। बल्कि सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल जैसे आदमकद नेताओं को निगला जिस लहरू के लिए वही लहरुआ इसलिए मरवा दिया कि इसके रहते गोरी मेम का लिखा संविधान पारित नहीं हो पायेगा और हे राम की कहानी गढ़ के, इसको बापू और खुद को चिच्चा बना बैठा।

ब्रह्मचर्य इतना लिजलिजा कि अपनी खुद की भतीजी को नंगा साथ सुलाये ये कह के कि मैं तेरी मा हूँ और बड़ी भारी क्रांति के जनक जय प्रकाश नारायण अपना सर पटक के उसकी देहरी पे पथरा जाय ये माँग करते हुए कि बापू मेरी बीबी लौटा दो…


पंजशीर की लड़ाई जैसा कि मैंने कहा था लम्बी चलेगी


क्या पर्सनल और क्या प्रोफेशनल? गाय के दूध में हिंसा बताकर बकरी किसलिए पालते थे जब पीना बादाम का दूध था? गंगूबाई(दलित महिला) को भगा लाने की वजह से गांव से भगाये गये टैगोर परिवार के जबर गुलाम को गुरूदेव बताकर उसकी सगी भतीजी के साथ अनैतिक सम्बन्ध बना लिए। उस गुलाम को लहरू गैंग का गुर्गा नियुक्त करके जिससे उसको पहला नागरिक नॉबेल प्राइज आदि के फायदे मिल जाँय और उसके बदले में उस गुरूदेव से महात्मा की उपाधि लेकर कैसर की उपाधि ढकने वाला जैसे दो खजहे कुत्ते एक दूसरे की पीठ खुजा रहे हों, ऐसे महात्माओं और गुरुदेवों जैसे शब्द को कलंकित करने के पापियों को ये समाज अनंत काल तक जूतञ्जली देता रहेगा। अहिंसा का पुजारी, हिंसा का व्यापारी, लाया महामारी ……ऐसा है महात्मा गाँधी अत्याचारी !

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