मोदी-योगी मॉडल

देश में अब मोदी-योगी मॉडल ही चलेंगे

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  • कौशल सिखौला


एक बात मान लीजिए, कुछ लोगों को बेशक नाम से घृणा हो और शक्ल से नफ़रत हो। देश में अब मोदी- योगी मॉडल ही चलेंगे। मोदी मॉडल की दीवानगी लोगों के सिर चढ़कर बोलती है, अभी लम्बे समय तक बोलती भी रहेगी। योगी मॉडल राज्यों में चल निकला है, अनेक राज्यों ने गुडों बदमाशों और माफियाओं की फाइलें बुलडोजर की कलम से लिखनी शुरू कर दी हैं।

उत्तर भारत के हरियाणा तथा मध्य प्रदेश में ही नहीं, यह मॉडल अब सुदूर दक्षिण के कर्नाटक तक जा पहुंचा है। रही मोदी मॉडल की बात , लगता तो यही है कि 2014 से 2019 होते हुए इस मॉडल की अगली यात्रा अभी बाकी है।

लगातार होते रहे सर्वे भी यही बताते हैं और राज्यों के चुनावों से लेकर राष्ट्रपति – उपराष्ट्रपति के चुनाव परिणामों से यह साबित भी हो चुका है।

यह जरूर है कि देश में अनेक राजनैतिक दल और हमारे अनेक मित्र यह मानने को तैयार नहीं कि अगली बार एनडीए की वापसी फिर हो रही है। इसके लिए महंगाई , भ्रष्टाचार आदि पुराने रटे रटाए मुद्दों का हवाला दिया जाता है। और भी हजारों सवाल विपक्ष के पास हैं।

लेकिन मोदी और योगी मॉडल की कोई काट देश का विपक्ष आज तक प्रस्तुत नहीं कर पाया। अब कल ही नोएडा सोसायटी में माफिया के घर पर जब बुलडोजर चला तो सारा नोएडा योगी मोदी के नारे लगाने लगा। योगी के बुलडोजर पर कानूनी सवाल उठाए जा सकते हैं। कईं परिभाषाओं में इसे सही नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन माफियाओं, लुटेरों और गुंडों से ऊब चुकी देश की जनता को यही मॉडल पसंद है तो फिर है और चलेगा भी यही।

देश की जनता बहुत समझदार है। वह सही नेताओं को पसंद करती है। हमारे देश में बहुत से प्रधानमंत्री ऐसे रहे हैं जो चुनाव का सामना भी नहीं कर पाए। कुछ पीएम ऐसे भी रहे जो राज्यसभा से आए। बहुत से प्रधानमंत्री मास लीडर रहे, जिनके पीछे जनता दीवानी थी।


मूल्यों एवं मर्यादाओं से शून्य मनुष्य आदिमानव ही है !

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इनमें पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेई और नरेंद्र मोदी प्रमुख हैं। इनके समर्थक प्रायः सभी प्रांतों में रहे , भले ही उन प्रांतों में उनकी सरकार न हो। देश के अधिकांश राज्यों में बीजेपी की सरकार है,  अधिकांश में नहीं है। लेकिन मोदी आज सब राज्यों के लोगों की पसंद हैं।

आश्चर्य तब होता है कि कानून व्यवस्था की बात आने पर अधिकांश जनता योगी के स्टाइल को पसंद करती है। बुलडोजर योगी का दमदार ब्रांड बन चुका है। बेशक समाज का एक वर्ग योगी को ही नहीं मोदी को भी कतई नापसंद करता है, बीजेपी को वोट नहीं करता।

परंतु इस नफ़रत से समाज का एक काफी बड़ा वर्ग मोदी के साथ आ खड़ा होता है। सरकार ने आज तक एक भी ऐसी नीति नहीं बनाई जो समाज के किसी अंग का विरोध करे। मतलब भारत की राजनीति में इन दोनों मॉडलों को काफी वक्त बिताना बाकी है। बात सच है, किंतु जिन्हें नापसंद हों, उनके अंजान बने रहने में कोई हर्ज नहीं। खुशफहमियों को जीने का सहारा बनाना अच्छा है।

 

 

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