1 दिन का धरना खत्म, अब पूरे सत्र का बहिष्कार करेंगे विपक्षी सांसद

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राज्यसभा के 8 निलंबित सांसदों ने तीन मांगों को लेकर मानसून सत्र का बहिष्कार कर रहे विपक्षी सांसदों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए अपना धरना समाप्त कर दिया है। सत्र के बहिष्कार के माध्यम से, विपक्ष ने सांसदों के निलंबन को निरस्त करने की मांग की है। विपक्ष ने यह भी मांग की है कि सरकार एक विधेयक लाए जो यह सुनिश्चित करे कि निजी पक्षों को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे अनाज की खरीद नहीं करने दे जायेगा।

संसद परिसर में आठ निलंबित सांसदों द्वारा धरना-प्रदर्शन मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा, राज्यसभा के उप-सभापति हरिवंश सिंह ने उन्हें सुबह चाय दी। हालाँकि अराजक सांसदों ने चाय ठुकरा दी और उन्हें ही ज़िम्मेदार ठहरा दिया।

निलंबित सांसदों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास लॉन में रात बिताई, संसद परिसर में इस तरह का पहला रातोंरात विरोध प्रदर्शन किया गया। विपक्षी नेताओं ने गाने गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हरिवंश सिंह का कृत उनकी महानता का प्रमाण है। निलंबन के नाटक के सामने आने के बाद से हरिवंश सिंह निशाने पर हो गए थे।आठ सांसदों को रविवार को कृषि विधेयकों के पारित होने के दौरान डिप्टी चेयरमैन के साथ उनके “दुर्व्यवहार” पर वर्तमान सत्र के शेष भाग के लिए निलंबित कर दिया गया था।

 

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हरिवंश नारायण के जवाब में शरद पवार का उपवास ड्रामा

हरिवंश नारायण के बाद शरद पवार ने भी अपने उपवास रखने का ड्रामा शुरु कर दिया है। उनका मानना है कि सांसदों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। इसीलिए उन्होंने अपना दुख प्रकट करने के लिए 1 दिन का ड्रामा उपवास रख लिया है। शरद पवार राज्य के साथ राष्ट्र में भी सीनियर लीडर की पीछे से निभा कर खुद को राजनीति का शेर साबित करना चाहते है जबकि उनकी जनता में कोई भी पहुँच नहीं रही है फिर भी 22 साल पहले की तरह एक फिर से प्रधानमंत्री बनने की चाह उनमें अभी भी बाकी रह गई है, क्या करें आखिर सत्ता का नशा रिटायर होने भी नहीं देता है।

 

 

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