स्वीडन मुस्लिम प्रदर्शन

स्वीडन में इस्लाम विरोधी रैली होने पर मुस्लिमों का उग्र प्रदर्शन, जलाया गया था कुरान

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स्वीडन के माल्मो शहर में शुक्रवार को देर रात प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके, गाड़ियां फोड़ी और उनके टायर जला दिए। इसके पीछे वजह है एक मुस्लिम विरोधी डेनमार्क के राजनेता रैसमस पलुदन द्वारा पास में एक कुरान जलाने की रैली में भाग लेने से रोक दिया जाना, जिसके बाद प्रर्दशनकारी उग्र हो गए और उन्होंने पुलिस के साथ हिंसा करी।

कुरान जलाने वाली इस्लाम विरोधी गतिविधियों के विरोध में कम से कम 300 लोग एकत्र हुए थे। यह प्रदर्शन उस दिन की घटना से पहले जुड़ा था जिसमें प्रदर्शनकारियों ने इस्लामिक पवित्र पुस्तक की एक प्रति जला दी थी, पुलिस प्रवक्ता रिकार्ड लुंडकविस्ट ने स्वीडिश टैब्लॉयड एक्सप्रेसन को बताया।

रैसमस पालदन , जो कि राइट विंग अप्रवासी- विरोधी आव्रजन पार्टी का नेतृत्व करते हैं, उस कार्यक्रम में बोलने के लिए माल्मो की यात्रा करने वाले थे, जो उसी दिन मुस्लिम सब्त के लिए साप्ताहिक प्रार्थना के रूप में आयोजित किया जा रहा था।

लेकिन अधिकारियों ने पालदन के आगमन से पहले ही घोषणा कर दी कि उसे स्वीडन में दो साल के लिए प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। बाद में उन्हें माल्मो शहर के पास गिरफ्तार कर लिया गया।

प्रदर्शन उसी जगह पर बढ़े थे जहां कुरान जलाया गया था। शुक्रवार को माल्मो शहर में कई इस्लाम विरोधी गतिविधियां हुईं, जिनमें तीन लोगों ने एक सार्वजानिक रूप में उनके बीच कुरान की एक प्रति जलाकर उसे लात मार दी।

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इस्लाम मज़हब को मानने वाले मुस्लिमों के लिए कुरान ही सबसे बड़ी पुस्तक है जिसे अल्लाह के फ़रिश्तो द्वारा पैगम्बर मोहम्मद के पास उत्तरी माना जाता है। यूरोप के अलग-अलग देशों में पहले भी इस्लाम विरोधी कृत्यों की वजह से मुस्लिम समाज द्वारा ऐसे उग्र प्रदर्शन देखने को मिल चुके हैं।

आपको बता दें कि रैसमस पलुदन ने पिछले साल बेकन (एक प्रकार का सुअर मांस) में लिपटे कुरान को जलाने के लिए मीडिया का ध्यान आकर्षित किया था जो कि मुसलमानों के लिए हराम है।

साम्प्रदायिकता फैलाना किसी भी तरह से सभ्य समाज में उचित नहीं कहा जा सकता किन्तु जब मिडिल-ईस्ट देशों में हिन्दू धर्म के भगवानो की मूर्तियों का अपमान किया जाता है, अपने धर्म को मानने वाले लोगों पर इस्लामिक सरकार अत्याचार करती है तब किसी भी बुद्धिजीवी एवं मानवाधिकार सूरमा को साम्प्रदयिक रंग नहीं दिखता है और कोई भी आलोचना-विरोध करने सामने नहीं आता तो ऐसे एक क्रिया की प्रतिक्रिया होना भी स्वाभाविक है जिसके लिए इस्लाम मानने वाले मुस्लिमों को तैयार रहना चाहिए वह भी दुनिया के किसी भी कोने में।

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