वीर दास

निर्लज्ज हो तुम वीर दास ! फिरंगी ज़मीन पर नारियों का अपमान अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं होती

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निर्लज्ज हो तुम वीर दास ! फिरंगी ज़मीन पर नारियों का अपमान अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं होती ! पिछले 2 दिनों से सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं निम्न दर्ज़े के गुमनाम रहने वाले वीर दास जो खुद को हास्य कलाकार यानी कॉमेडियन बताते है लेकिन उनके शोज में कॉमेडियन वाली कोई भी सामग्री नहीं रहती, कॉमेडियन वाली कोई भी हरकत, कोई भी चुटकुला उनका नहीं होता है फिर भी वो लेफ्ट समूह में सबके के चहेते हैं। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर वह केवल अश्लीलता, बदतमीज़ी, और भौंडापन पेश करते हैं।

वैसे तो अक्सर ऐसे अश्लील और असामाजिक व्यक्तियों के बारे में जिक्र करने में भी मैं संकोच करता हूं परंतु इस निर्लज्ज व्यक्ति जिसका नाम वीर दास है इसने फिरंगी जमीन पर देश का अपमान किया, देश के प्रधानमंत्री को गाली दी और उससे भी नीचे स्तर पर जाते हुए उसने देश की नारियों का अपमान किया है जो कि कतई तौर पर एक सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

वीर दास की तथाकथित कॉमेडी या फिर तो कहें अश्लीलता के कुछ उदाहरणों से ही उनकी विकृत मानसिकता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। अपने लेटेस्ट शो में वह “टू इंडिया” यानी दो भारत के बारे में बताता है जिसमें से एक का हिस्सा वह स्वयं (जो उसके हिसाब से अच्छा) है।

वह भारत को ऐसे देश के तौर पर देखता है जहां दिन में नारी की पूजा होती है और रात में वहां उसका रेप होता है। वह कहता है कि किसी के द्वारा एयर होस्टेस का रेप हो तो वह बीच में रुक जाए ताकि उसके अनाउंसमेंट्स की आवाज सुनने में अलग मजा आएगा। वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पेंटी में करंट होने की भी बात करता है और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की ही दिग्गज नेता और सांसद महुआ मित्रा उसकी तारीफ दूसरी बात को लेकर कर चुकी है।

हर किसी को अपना देश प्यारा नहीं होता, हर किसी को अपने प्रधानमंत्री का सम्मान नहीं होता लेकिन क्या अपने देश की नारियों का सरेआम अपमान करना वह भी फिरंगी जमीन पर यह किसी भी पढ़े लिखे इंसान को शोभा देता है? क्या वीर दास एक इंसान नहीं है? क्या उसके अंदर जानवर से भी बदतर प्रकृति घर कर गई है ?


 

वीर दास मानसिक रूप से विकृत है इसमें कोई शक नहीं है। देश में उसके खिलाफ दो एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और जब मामला तूल पकड़ गया या दूसरे शब्दों में कहें तो जब उसे अपने अश्लील काम को लेकर मुफ्त की पब्लिसिटी मिल गई।


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वैसे मानसिक रूप से अंग्रेज़ों के “दास” वीर दास को अपने घटिया कृत यानी महिलाओं का अपमान फिरंगी जमीन पर करने पर अमेरिका के वोक लोगों द्वारा वाहवाही ज़रूर मिली होगी किन्तु शायद ही इस अहमक शख्स को पता होगा कि उसने जिस अमेरिका में उसने यह गन्दी कॉमेडी की है वहां पर खुद भारत से जनसंख्या कम होने के बावजूद रेप की दर कइयों गुना ज्यादा है।

ताज्जुब तो इस बात पर भी होता है कि अमेरिका हो या भारत ऐसे स्त्री विरोधी अश्लील भौंडे व्यक्ति के घटिया कॉमेडी वाले शोज़ में महिलाएं कम से कम क्यों जाती हैं? लड़कियों को अपने ऊपर गालियां सुन के हंसी कैसे आ सकती है? अपने गुप्तांग पर टिप्पणी, अपने ऊपर बनी भद्दी गालियां, अपनी बेइज्जती, अपना अपमान कोई लड़की सहर्ष स्वीकार कैसे कर सकती है यही कारण है कि वीर दास जैसे लोग ऐसे घटिया कृपा करके चैन से सो लेते हैं और माफी तक नहीं मांगते क्योंकि उन्हें अपनी गलती इसमें दिखती ही नहीं है और केवल कुतर्की सफाई देकर वह अपने बिल में छुप जाते हैं।

जरूरी है कि ऐसे स्त्री विरोधी अश्लील व्यक्ति को अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर पूहड़ता, अश्लीलता और नारियों का अपमान करने की इजाजत ना दी जाए, इस पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और इसे सलाखों के पीछे डाला जाए और ऐसा करने के लिए महिलाओं को आगे आना होगा।

तभी जाकर ऐसे अश्लील लोग कॉमेडी जैसी रचनात्मक कला का अपमान करने से पहले भी कई बार सोचेंगे। वीर दास जैसे घटिया लोगों को केवल इतनी हिदायत है कि अब सभ्य समाज देश, धर्म और नारियों का अपमान नहीं सहन करेगा।

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